पेंशनर्स को एरियर्स न देने कोर्ट जाएगी जाएगी सरकार:फाइनेंस ने सभी विभागों को स्थगन लेने कहा, 32 माह और 27 माह के पेंडिंग हैं
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →मध्य प्रदेश के पेंशनर्स को 59 महीने का एरियर्स देने के बजाय राज्य सरकार इस मामले में कोर्ट से स्थगन लेने की तैयारी में है। इसको लेकर वित्त विभाग ने राज्य शासन के सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने विभाग से संबंधित मामले में 32 माह और 27 माह के अलग-अलग पेंशन पुनरीक्षण एरियर्स की राशि का भुगतान करने के बजाय इश मामले में प्रभारी अधिकारी या शासकीय अधिवक्ता के माध्यम से स्थगन हासिल करने के लिए प्रयास करें।
राज्य शासन ने पेंशन पुनरीक्षण एरियर से जुड़े लंबित मामलों को लेकर सभी विभागों के साथ संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को भी इसी तरह के निर्देश जारी किए हैं। सोमवार को जारी आदेश के अनुसार 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक के 32 माह तथा 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक के 27 माह की अवधि के पेंशन पुनरीक्षण एरियर भुगतान से संबंधित प्रकरणों में कार्रवाई की जानी है।
इन मामलों में भुगतान के बजाय स्थगन हासिल करने के लिए काम करना है। हाईकोर्ट के आदेशों का दिया हवाला वित्त विभाग ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के आदेशों का उल्लेख करते हुए कहा है कि इस विषय से जुड़े मामलों में न्यायालय के समक्ष आगे की कार्यवाही की स्थिति स्पष्ट है। आदेश में WA-760/2026 और WA-2182/2025 में पारित आदेशों का संदर्भ दिया गया है।
संबंधित कानूनी मुद्दे को बड़ी पीठ के समक्ष भेजे जाने के कारण सुनवाई फिलहाल लंबित है और संबंधित आदेशों के संचालन पर स्थगन प्रभावी है। वर्तमान में प्रदेश में चार लाख से अधिक पेंशनर्स हैं लेकिन आदेश में यह स्पष्ट नहीं है कि कितने मामलों में एरियर्स की राशि दिया जाना है। लंबित मामलों में क्या करना होगा वित्त विभाग ने निर्देश दिए हैं कि पेंशन पुनरीक्षण एरियर भुगतान से जुड़े सभी लंबित प्रकरणों और अवमानना याचिकाओं में हाईकोर्ट द्वारा पारित स्थगन आदेशों के आधार पर आवश्यक विधिक स्थगन प्राप्त करने की कार्रवाई शासकीय अधिवक्ता के माध्यम से सुनिश्चित की जाए।
पेंशनर्स के लिए इसका मतलब इस आदेश का सीधा संबंध उन पेंशनर्स से है जिनके 32 माह और 27 माह की संबंधित अवधि के पेंशन पुनरीक्षण एरियर से जुड़े मामले न्यायालयों में लंबित हैं। हालांकि, इस आदेश में तत्काल सभी पेंशनर्स को एरियर भुगतान शुरू करने का निर्देश नहीं, बल्कि लंबित न्यायिक मामलों में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
यानी फिलहाल मामला न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है और आगे की कार्रवाई संबंधित न्यायालयों के आदेशों पर निर्भर रहेगी।
📡 स्रोत: NewsData.io