पीबी शब्द: प्रसार भारती की विश्वसनीय समाचार सेवा से देश के मीडिया संस्थानों तक पहुंच रही बहुभाषी खबरें
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Date- 24 September 2026, Delhi
पीबी शब्द भारत के सार्वजनिक सेवा प्रसारक प्रसार भारती की निःशुल्क समाचार फीड सेवा है, जिसे मार्च 2024 में विस्तारित मीडिया उद्योग के लिए समाचार वायर के रूप में शुरू किया गया था।
पंजीकृत मीडिया संगठन इस सेवा के माध्यम से 15 भारतीय भाषाओं में टेक्स्ट, वीडियो, ऑडियो, फोटोग्राफ और इन्फोग्राफिक्स प्राप्त कर सकते हैं। सेवा की निःशुल्क पहुंच मार्च 2027 तक सुनिश्चित की गई है और दो वर्षों के संचालन में इसका उपयोगकर्ता आधार 3,600 मीडिया संगठनों तक पहुंच गया है। इसकी सामग्री प्रसार भारती के देशव्यापी समाचार नेटवर्क से जुटाई जाती है और संपादकीय जांच की कई स्तरों वाली प्रक्रिया से गुजरती है। इस तरह पीबी शब्द देश के मीडिया परिदृश्य में सत्यापित और उपयोग के लिए तैयार समाचार सामग्री की पहुंच बढ़ाने में भूमिका निभाता है।
पीबीएनएस से पीबी शब्द तक सार्वजनिक समाचार सेवा का विस्तार
प्रसार भारती भारत का सार्वजनिक सेवा प्रसारक है और संसद के एक कानून के तहत गठित स्वायत्त निकाय है। प्रसार भारती अधिनियम, 1990 के तहत निगम 23 नवंबर 1997 को अस्तित्व में आया। यह अपने दो प्रमुख घटकों—आकाशवाणी और दूरदर्शन—के माध्यम से कार्य करता है। इसका दायित्व जनहित में सूचना का निष्पक्ष और संतुलित प्रवाह सुनिश्चित करना है।
आंतरिक न्यूज वायर से खुले समाचार मंच तक
प्रसार भारती न्यूज सर्विस (पीबीएनएस) की शुरुआत एक समाचार वायर सेवा के रूप में हुई थी। इसका उपयोग मुख्य रूप से प्रसार भारती की अपनी संपादकीय टीमों द्वारा किया जाता था। इसकी समाचार सामग्री और फीड आकाशवाणी तथा दूरदर्शन के समाचार बुलेटिनों के लिए उपयोगी होती थी। उस समय यह सेवा मुख्य रूप से आंतरिक न्यूजरूम संसाधन के रूप में सीमित थी।
मार्च 2024 में इस सेवा का दायरा बढ़ाया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 13 मार्च 2024 को नई दिल्ली में पीबी शब्द का शुभारंभ किया। इसका विस्तृत नाम ‘प्रसार भारती-शेयर्ड ऑडियो-विजुअल्स फॉर ब्रॉडकास्ट एंड डिसेमिनेशन’ है। यह पंजीकृत मीडिया संगठनों को टेक्स्ट, वीडियो, ऑडियो, फोटो और इन्फोग्राफिक्स के रूप में निःशुल्क और उपयोग के लिए तैयार समाचार सामग्री उपलब्ध कराता है।
इस तरह एक आंतरिक समाचार वायर सेवा का विस्तार मल्टीमीडिया समाचार-साझाकरण मंच के रूप में हुआ।
पीबी शब्द की विकास यात्रा
वर्ष महत्वपूर्ण घटना 1990 संसद ने प्रसार भारती कानून बनाया।
1997 प्रसार भारती निगम 23 नवंबर को अस्तित्व में आया।
2024 तक पीबीएनएस प्रसार भारती की संपादकीय टीमों के लिए आंतरिक समाचार वायर सेवा के रूप में कार्य करता रहा।
मार्च 2024 पीबी शब्द 13 मार्च को निःशुल्क, बहु-प्रारूप समाचार-साझाकरण मंच के रूप में शुरू हुआ।
मार्च 2025 एक वर्ष पूरा होने पर निःशुल्क पहुंच को मार्च 2026 तक बढ़ाया गया।
मार्च 2026 निःशुल्क पहुंच को मार्च 2027 तक बढ़ा दिया गया।
आगे नए उत्पाद वर्गों और बेहतर सामग्री वितरण के साथ पीबी शब्द 2.0 की योजना पर काम किया जा रहा है।
पुराने समाचार बुनियादी ढांचे का विस्तार
पीबी शब्द कोई नए सिरे से तैयार किया गया न्यूजरूम नहीं है। यह कई दशकों में विकसित किए गए प्रसार भारती के समाचार बुनियादी ढांचे का विस्तार है। वही संवाददाता, डेस्क और ब्यूरो अब पहले की तुलना में व्यापक उपयोगकर्ता वर्ग के लिए सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। सेवा के उपयोग का दायरा बदला है, जबकि इसके पीछे मौजूद संपादकीय और समाचार-संग्रह का आधार कायम है।
नाम में भी छिपा है अर्थ
पीबी शब्द के नाम के दो संदर्भ हैं। इसका विस्तृत रूप ‘शेयर्ड ऑडियो-विजुअल्स फॉर ब्रॉडकास्ट एंड डिसेमिनेशन’ है। वहीं हिंदी में ‘शब्द’ का अर्थ बोले या लिखे गए शब्द से है। इस मंच का उद्देश्य समाचार और सूचना को व्यापक स्तर पर, तेजी से और निःशुल्क साझा करना है।
पीबी शब्द: बहु-प्रारूप और बहुभाषी समाचार फीड
पीबी शब्द प्रसार भारती की समाचार फीड सेवा है, जो चौबीसों घंटे मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है। यह भारत और दुनिया से समयबद्ध, सत्यापित और उपयोग के लिए तैयार समाचार सामग्री उपलब्ध कराती है। फीड में राष्ट्रीय राजधानी से लेकर जिला मुख्यालयों तक होने वाले घटनाक्रमों को शामिल किया जाता है।
3,600 मीडिया संगठनों तक पहुंच
इस सेवा के उपयोगकर्ताओं में पंजीकृत मीडिया संगठन, डिजिटल प्रकाशक और कंटेंट क्रिएटर शामिल हैं। समाचार पत्र, समाचार टेलीविजन चैनल और डिजिटल समाचार प्रकाशक इसके प्रमुख उपयोगकर्ता हैं। दो वर्षों के संचालन के दौरान इसका उपयोगकर्ता आधार बढ़कर 3,600 मीडिया संगठनों तक पहुंच गया है।
पांच प्रारूपों में सामग्री
पीबी शब्द पर टेक्स्ट, वीडियो, ऑडियो, फोटोग्राफ और इन्फोग्राफिक्स के रूप में सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। समाचार 15 भारतीय भाषाओं और करीब 50 समाचार श्रेणियों में उपलब्ध हैं। इसका कवरेज राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय घटनाक्रमों तक विस्तृत है। यह सेवा पंजीकृत उपयोगकर्ताओं के लिए निःशुल्क है। डाउनलोड की जाने वाली सामग्री के लिए कोई सदस्यता शुल्क नहीं लिया जाता है। निःशुल्क पहुंच मार्च 2027 तक सुनिश्चित की गई है।
कौन कर सकता है पंजीकरण
पंजीकृत समाचार पत्र और पत्रिकाएं वैध आरएनआई प्रमाण-पत्र के साथ पंजीकरण कर सकती हैं। टेलीविजन और रेडियो चैनलों के लिए वैध अपलिंक और डाउनलिंक प्रमाण-पत्र आवश्यक हैं। डिजिटल प्रकाशक पैन की प्रति जमा करके पंजीकरण कर सकते हैं। प्रत्येक संगठन को एक लॉगिन उपलब्ध कराया जाता है, जिसे न्यूजरूम के भीतर उसके पत्रकार इस्तेमाल कर सकते हैं।
एक मंच, अनेक डिजिटल जरूरतें
पीबी शब्द को केवल एक समाचार वायर सेवा के बजाय विभिन्न न्यूजरूम की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सेवाओं के समूह के रूप में तैयार किया गया है। इसके विभिन्न उत्पाद अलग-अलग प्रकार के मीडिया संगठनों और डिजिटल उपयोगकर्ताओं के लिए सामग्री उपलब्ध कराने पर केंद्रित हैं।
बिना लोगो और क्रेडिट लाइन की बाध्यता
पीबी शब्द की एक विशेषता यह है कि उपलब्ध कराई गई सामग्री पर प्रसार भारती का लोगो नहीं होता और इसके लिए अनिवार्य क्रेडिट लाइन की आवश्यकता नहीं होती। इससे छोटे और क्षेत्रीय मीडिया संगठन भी उपलब्ध समाचार सामग्री को अपने प्रकाशन या प्रसारण के अनुरूप इस्तेमाल कर सकते हैं।
जमीनी स्तर से न्यूजरूम तक पीबी शब्द का नेटवर्क
पीबी शब्द की प्रमुख ताकत उसके पीछे मौजूद समाचार-संग्रह नेटवर्क में है। प्रसार भारती देश के बड़े समाचार संकलन और संपादकीय नेटवर्क में से एक संचालित करता है। समाचार उपलब्ध कराने में 1,500 से अधिक रिपोर्टर, संवाददाता और स्ट्रिंगर योगदान देते हैं। उनके द्वारा भेजी गई सामग्री पर 60 समर्पित संपादकीय डेस्क चौबीसों घंटे काम करते हैं।
आकाशवाणी और दूरदर्शन का व्यापक नेटवर्क
आकाशवाणी और दूरदर्शन अपनी-अपनी क्षेत्रीय समाचार इकाइयों और समाचार बुलेटिन सेवाओं के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों को कवर करते हैं। दोनों नेटवर्क मिलकर लगभग प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से समाचार सामग्री जुटाते हैं।
प्रसार भारती के समाचार नेटवर्क की पहुंच
नेटवर्क जमीनी स्तर पर पहुंच
आकाशवाणी समाचार 46 क्षेत्रीय समाचार इकाइयां और एक मुख्यालय; 92 भाषाओं और बोलियों में प्रतिदिन 607 समाचार बुलेटिन
दूरदर्शन समाचार 31 क्षेत्रीय समाचार इकाइयां और एक मुख्यालय; 22 भाषाओं और बोलियों में 145 से अधिक बुलेटिन
फील्ड नेटवर्क देशभर में 1,500 से अधिक रिपोर्टर, संवाददाता और स्ट्रिंगर
संपादकीय डेस्क चौबीसों घंटे काम करने वाले 60 समर्पित डेस्क
प्रसार से पहले कई स्तरों पर संपादकीय जांच
पीबी शब्द पर उपलब्ध समाचार सामग्री संपादकीय जांच की कई स्तरों वाली प्रक्रिया से गुजरती है। सेवा फर्जी, रूपांतरित या हेरफेर की गई सामग्री से बचाव के लिए सुरक्षा उपाय अपनाती है। अप्रमाणित ऑनलाइन स्रोतों से प्राप्त सामग्री के मामले में भी सावधानी बरती जाती है। समाचार सामग्री में समय, स्थान और उचित कैप्शन जैसी आवश्यक जानकारियां शामिल की जाती हैं, ताकि उपयोगकर्ताओं को यह स्पष्ट रहे कि कोई घटनाक्रम कब और कहां हुआ। समाचार संकलन और संपादकीय नेटवर्क के साथ तकनीकी व्यवस्था इस पूरी प्रक्रिया को व्यापक स्तर पर संचालित करने में मदद करती है।
सटीकता, प्रामाणिकता और समयबद्धता पर जोर
पीबी शब्द की कार्यप्रणाली में सटीकता और प्रामाणिकता को प्रमुख स्थान दिया गया है। सामग्री साझा किए जाने से पहले उसे पेशेवर तरीके से तैयार और संपादित किया जाता है। चौबीसों घंटे उपलब्ध फीड का उद्देश्य सत्यापित समाचार को उपयोगकर्ताओं तक समय पर पहुंचाना है। विभिन्न प्रारूपों और भाषाओं में उपलब्ध सामग्री इसे अलग-अलग प्रकार के मीडिया संगठनों के लिए उपयोगी बनाती है।
भारत के विविध मीडिया इकोसिस्टम को जोड़ने वाला मंच
आज समाचार एक साथ कई माध्यमों से दर्शकों और पाठकों तक पहुंचते हैं। टेलीविजन, समाचार पत्र, वेबसाइट, मोबाइल एप्लिकेशन, यूट्यूब और सोशल मीडिया जैसे मंचों पर दिनभर घटनाक्रमों की जानकारी प्रकाशित और प्रसारित होती है। ऐसे में न्यूजरूम को एक ही समाचार को कई प्रारूपों में तैयार करना पड़ता है। पीबी शब्द प्रसार भारती के समाचार संकलन और संपादकीय बुनियादी ढांचे को इस व्यापक मीडिया इकोसिस्टम से जोड़ता है। समाचार पत्र, टेलीविजन प्रसारक, डिजिटल प्रकाशक, कंटेंट क्रिएटर और अन्य मीडिया मंच एक ही फीड से विभिन्न प्रारूपों में सामग्री प्राप्त कर सकते हैं।
छोटे और क्षेत्रीय मीडिया संगठनों के लिए उपयोगी
इसका लाभ छोटे और क्षेत्रीय संगठनों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। किसी जिला स्तर के समाचार पत्र के लिए दिल्ली या विदेशों में अलग संवाददाता नेटवर्क स्थापित करना हमेशा संभव नहीं होता। पीबी शब्द के माध्यम से ऐसे संगठन पेशेवर रूप से तैयार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार सामग्री तक पहुंच बना सकते हैं। उपयोग के लिए तैयार टेक्स्ट, वीडियो और ऑडियो सामग्री से समाचार तैयार करने में लगने वाले समय और संसाधनों को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे क्षेत्रीय मीडिया संगठनों को अपने स्थानीय कवरेज के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों को भी शामिल करने का अवसर मिलता है।
आगे की राह: पीबी शब्द 2.0 की तैयारी
पीबी शब्द प्रसार भारती की समाचार संकलन क्षमता को उसके अपने प्रसारण माध्यमों से आगे तक पहुंचाने की दिशा में काम करता है। इसके माध्यम से सत्यापित समाचार सामग्री विभिन्न स्वतंत्र मीडिया माध्यमों तक पहुंचती है। सेवा की निःशुल्क पहुंच मार्च 2027 तक बढ़ाई गई है, जिससे पंजीकृत मीडिया संगठन इसके उपयोग की योजना बना सकते हैं। आने वाले समय में नए उत्पाद वर्गों और बेहतर सामग्री वितरण के साथ पीबी शब्द 2.0 की योजना बनाई गई है। दो वर्षों में 3,600 मीडिया संगठनों तक पहुंच बनाने के बाद सेवा का अगला चरण इसके उपयोग और सामग्री वितरण के विस्तार पर केंद्रित है।
सत्यापित सूचना को व्यापक पहुंच देने का प्रयास
सूचना के तेज प्रवाह के दौर में सत्यापित समाचार सामग्री का महत्व बढ़ गया है। प्रसार भारती का यह मंच अपने समाचार-संग्रह और संपादकीय नेटवर्क के माध्यम से तैयार सामग्री को विभिन्न मीडिया संगठनों तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है। बहुभाषी और बहु-प्रारूप फीड के जरिए पीबी शब्द देश के विविध मीडिया इकोसिस्टम को एक साझा समाचार बुनियादी ढांचे से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है।
🎙️ जनता का संदेश का मत
प्रसार भारती की निःशुल्क बहुभाषी समाचार सेवा से मीडिया को सशक्त बनाना समाज के ज्ञान को बढ़ाता है, जिससे सूचित निर्णय लेने में मदद मिलती है। जब सूचना का प्रसार समान रूप से हो, तो गलतफहमी और संघर्ष कम होते हैं, और लोग आपसी समझ से समाधान खोजते हैं। इस पहल से हम सभी को मिलकर एक समावेशी, पारदर्शी और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण करने की प्रेरणा मिलती है।