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पीड़ित और अपराधी में फ़र्क नहीं कर पा रहे? संयुक्त राष्ट्र में इस्लामिक ग्रुप IOC को भारत से अच्छे से समझा दिया

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 10 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
पीड़ित और अपराधी में फ़र्क नहीं कर पा रहे? संयुक्त राष्ट्र में इस्लामिक ग्रुप IOC को भारत से अच्छे से समझा दिया

भारत ने ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में मौजूद आतंकी नेटवर्क के ख़िलाफ़ नई दिल्ली की कार्रवाई पर की गई टिप्पणी के लिए फटकार लगाई। भारत ने कहा कि यह संगठन पीड़ित और अपराधी के बीच फ़र्क करने में नाकाम रहा है। यूएन जनरल असेंबली में BJP सांसद बिप्लब कुमार देब ने कहा कि मैं अब OIC चेयर के उस बयान का जवाब दे रहा हूं जो पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ढांचे के ख़िलाफ़ भारत की सोची-समझी और नपी-तुली कार्रवाई के बारे में दिया गया है।

यहीं से भारत के ख़िलाफ़ आतंकवादी हमलों की साज़िश रची जाती है और उन्हें अंजाम दिया जाता है। यह अफ़सोस की बात है कि बोलने वाले सच और झूठ के बीच फ़र्क नहीं कर पा रहे हैं और पीड़ित और अपराधी के बीच अंतर नहीं समझ पा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: RBI ने Repo Rate 0.25 फीसदी बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत किया उन्होंने आगे कहा कि भारत को पाकिस्तान की तरफ़ से सीमा पर होने वाले आतंकवाद से अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है।

आतंकवाद में शामिल होने के नतीजों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पश्चिम त्रिपुरा के लोकसभा सांसद ने UN जनरल असेंबली की छठी कमिटी में 'अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद को खत्म करने के उपायों' पर भारत का राष्ट्रीय बयान दिया। वह 15 सांसदों के उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं जो UN के कामकाज को समझने के लिए आयोजित UN फैमिलियराइजेशन वीक' (UN से परिचित होने का सप्ताह) के लिए यहां आए हैं।

देब ने कहा कि भारत कड़वे अनुभव से यह समझता है कि आतंकवाद का खतरा कोई सैद्धांतिक बात नहीं है, बल्कि एक लगातार बनी रहने वाली और रोज़ाना की सच्चाई है। उन्होंने कहा इस खतरे के अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, आर्थिक प्रगति, लोकतांत्रिक संस्थानों और मानवाधिकारों पर गंभीर असर पड़ते हैं।

यह हर इंसान के सबसे बुनियादी अधिकार जीने के अधिकार पर हमला करता है। इसे भी पढ़ें: Indian Spices पर अमेरिका में शुल्क छूट चाहते हैं ट्रेडर्स, ASTA ने की मांग उन्होंने कहा कि दशकों से हमारे लोग सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले जिसमें 26 पर्यटक मारे गए थे।

उन्होंने एक बार फिर आतंकवाद की वजह से होने वाले भारी मानवीय नुकसान को दिखाया। उन्होंने कहा कि पहलगाम में हुआ आतंकी हमला हमारी संप्रभुता पर एक सोची-समझी कार्रवाई थी। इसे उन नेटवर्क ने अंजाम दिया जिन्हें हमारी पश्चिमी सीमा के पार से सरकारी संरक्षण, सुरक्षित ठिकाने और हर तरह की मदद मिलती रहती है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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