पीएम श्री सरोजिनी नायडू कन्या स्कूल में नई शाला प्रबंधन समिति गठित
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झनक सिंह अध्यक्ष और बबली जाट उपाध्यक्ष निर्वाचित, 25 सदस्यीय समिति में अभिभावक, शिक्षक और अन्य सदस्य शामिल
बैरसिया। पीएम श्री शासकीय सरोजिनी नायडू कन्या विद्यालय, बैरसिया में मध्यप्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार शाला प्रबंधन एवं विकास समिति का गठन किया गया। 25 सदस्यीय समिति के गठन की प्रक्रिया के दौरान अभिभावकों, पार्षदों, शिक्षकों और अन्य सदस्यों की मौजूदगी रही।
बैठक में सदस्यों ने सर्वसम्मति से अभिभावक झनक सिंह को समिति का अध्यक्ष और श्रीमती बबली जाट को उपाध्यक्ष चुना। समिति के गठन एवं निर्वाचन की प्रक्रिया वरिष्ठ शिक्षक दिनेश कुमार शुक्ला के सहयोग से संपन्न कराई गई।
समिति में अभिभावक सदस्यों के रूप में गणेश बाबू मीणा, सपना कुशवाहा, रानी राजपूत, नोनीतराम, नीतू सिलावट, प्रमोद सिंह सोलंकी, बलबीर सिंह राजपूत और मंसाद खान सहित अन्य सदस्यों का चयन किया गया।
वहीं शासकीय सदस्यों में समिति की सचिव एवं प्राचार्य श्रीमती गीता जोशी, आरसी गोयल, शाहना, सुजाता पुरोहित, निधि श्रीवास्तव, दिनेश शुक्ला, सुरेश कुमार अहिरवार, अर्चना कुशवाह, बीडी विश्वकर्मा, तिलकना पवार और ललिता देवी वर्मा सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर चर्चा
समिति गठन के बाद प्राचार्य एवं सचिव श्रीमती गीता जोशी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इसमें विद्यालय की विभिन्न शैक्षणिक एवं सहशैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी नवनिर्वाचित सदस्यों को दी गई। बैठक में विद्यालय के संचालन और गतिविधियों से जुड़े विषयों पर भी सदस्यों ने अपने विचार रखे।
इस दौरान पार्षद कमलेश और सोनू कुशवाहा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। बैठक में पूर्व छात्रा महक बैरागी, अभिभावक बीरेंद्र जाट, अजब सिंह राजपूत सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
समिति के गठन पर प्राचार्य एवं विद्यालय स्टाफ ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सभी सदस्यों को शुभकामनाएं दीं। वरिष्ठ शिक्षक दिनेश शुक्ला ने समिति के गठन और निर्वाचन प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में सहयोग किया।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर पेरेंट्स और शिक्षकों के बीच सहयोग से शाला प्रबंधन समिति के गठन की है, जिसमें झनक सिंह अध्यक्ष और बबली जाट उपाध्यक्ष बने। यह कदम शासकीय विद्यालयों में शिक्षा सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि समिति के माध्यम से निर्णय लेने में अभिभावकों और शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित होती है। इससे विद्यालय की नीतियों में सुधार, संसाधनों का बेहतर उपयोग और छात्रों के शैक्षणिक अनुभव में वृद्धि संभव है। आम जनता को इससे शिक्षा गुणवत्ता में सुधार, बेहतर सुविधा और स्थानीय शिक्षा प्रशासन