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'पिंजरे का तोता कभी पिटबुल...', CBI-ED के अधिकारों पर चिदंबरम का तंज

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
'पिंजरे का तोता कभी पिटबुल...', CBI-ED के अधिकारों पर चिदंबरम का तंज

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी.

चिदंबरम ने CBI-ED को और ज्यादा अधिकार देने के विचार को खारिज करते हुए कहा कि निगरानी और देखरेख की कमी के कारण पिंजरे में बंद तोता कभी-कभी पिटबुल बन जाता है.

इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर यशोवर्धन आजाद की लिखी किताब 'पुलिसिंग द रिपब्लिक' के लॉन्च पर हुई एक पैनल चर्चा में चिदंबरम ने ये बातें कहीं

पुलिस की ज्यादतियों से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पुलिस में स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) से लेकर डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) तक एक हैरारकी होती है.

CBI में बेहतरीन अधिकारी होते हैं, जिनमें से ज़्यादातर राज्यों से डेपुटेशन पर आए होते हैं.

वही अधिकारी राज्य में तो अच्छा काम करता है, लेकिन केंद्र में आकर बुरा अधिकारी क्यों बन जाता है?

उन्होंने कहा कि देखरेख और निगरानी की कमी के कारण कभी-कभी पिंजरे में बंद तोता भी पिटबुल बन सकता है.

'राजनीतिक दखल की संभावना से इनकार नहीं'

चिदंबरम ने कहा कि वे राज्य और शायद केंद्र स्तर पर भी राजनीतिक दखल की संभावना से इनकार नहीं करते, लेकिन अधिकारियों को संगठन के अनुशासन का पालन करना चाहिए.

अगस्त 2019 में INX मीडिया मामले में CBI द्वारा गिरफ्तार किए गए कांग्रेस नेता ने आजाद की इस राय का विरोध किया कि ED और CBI को और ज्यादा अधिकार दिए जाने चाहिए.

चिदंबरम ने कहा कि CBI और ED ने अपने कानूनी अधिकार-क्षेत्र का बहुत ज्यादा उल्लंघन किया है. वे खुद ही कानून बन गए हैं.

'अधिकारी नेताओं के सामने क्यों नहीं डटते'

पूर्व गृह मंत्री ने सवाल किया कि IAS और IPS अधिकारी नेताओं के सामने क्यों नहीं डटकर खड़े होते. ज्यादा से ज्यादा क्या होगा?

तबादला हो जाएगा, लेकिन वे आपका सिर तो नहीं काट सकते.

उन्होंने आगे कहा कि मेरे हिसाब से CBI और ED के कामकाज की बाहरी निगरानी होनी चाहिए. अमेरिका में FBI और दूसरी संस्थाओं पर विधायी निगरानी होती है.

उन्होंने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी एक्ट 2008 में हुए एक संशोधन का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने एक प्रावधान पेश किया था जिसके तहत NIA की

📡 स्रोत: ABP Live

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