इतिहास

पिपलानी रामलीला में श्रवण प्रसंग और नारद मोह का भावपूर्ण मंचन, कलाकारों ने जीवंत किए रामचरितमानस के प्रसंग

लेखक: Santosh Yogi अंतिम अपडेट: 13 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
पिपलानी रामलीला में श्रवण प्रसंग और नारद मोह का भावपूर्ण मंचन, कलाकारों ने जीवंत किए रामचरितमानस के प्रसंग

भोपाल। विविध कला विकास समिति के तत्वावधान में पिपलानी में आयोजित रामलीला में श्रवण प्रसंग और नारद मोह का मंचन किया गया। कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से श्रीरामचरितमानस के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत किया। मंचन के जरिए श्रद्धालुओं को अहंकार, मोह, भक्ति और नियति के प्रभाव से जुड़ी सीख दी गई।

रामलीला मीडिया प्रवक्ता अतुल मालवीय ने बताया कि श्रवण प्रसंग रामकथा की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसी प्रसंग में राजा दशरथ से अनजाने में श्रवण कुमार की मृत्यु हो जाती है, जिसके बाद उनके माता-पिता उन्हें पुत्र वियोग का श्राप देते हैं। यह घटना आगे चलकर रामकथा की दिशा तय करने वाले प्रसंगों में शामिल होती है।

नारद मोह प्रसंग में दिखाया गया कि देवर्षि नारद हिमालय पर कठोर तपस्या कर रहे थे। उनकी तपस्या से चिंतित देवराज इंद्र ने कामदेव को उनकी साधना भंग करने के लिए भेजा, लेकिन कामदेव इसमें सफल नहीं हुए। नारद मुनि ने काम पर विजय प्राप्त की। इसके बाद कथा में उनके भीतर उत्पन्न अहंकार और आगे घटित होने वाली घटनाओं के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आध्यात्मिक उपलब्धि के बाद भी मनुष्य को अहंकार से बचना चाहिए।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में धर्मेंद्र सिंह, महाप्रबंधक (मटेरियल मैनेजमेंट), दिलीप कटियार, महाप्रबंधक (लॉजिस्टिक मैनेजमेंट) और सहायक कमांडेंट गौतम उपस्थित रहे। समिति के महासचिव आर.एस. अरोरा और वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिव प्रसाद साहू ने अतिथियों का स्वागत किया।

मंचन में श्रवण की भूमिका राहुल करण, श्रवण की माता की भूमिका जगदीश गुप्ता, श्रवण के पिता की भूमिका लक्ष्मण पाटिल, राजा दशरथ की भूमिका शिव प्रसाद साहू, नारद की भूमिका प्रभात मेहरा, इंद्र की भूमिका गौरव पाटिल, इंद्र के मंत्री की भूमिका क्रिस परिहार, विष्णु की भूमिका लोकेश मौर्य, शिव की भूमिका कबीर यादव और कामदेव की भूमिका अक्षय ने निभाई। योगमाया की भूमिका आनंदिता सोनी तथा शील की भूमिका हेमंत शिंदे ने निभाई।

कलाकारों के अभिनय और संवादों के माध्यम से रामकथा के प्रसंगों का सजीव चित्रण हुआ। आयोजन ने दर्शकों को धार्मिक आस्था के साथ जीवन में विनम्रता, संयम और सदाचार के महत्व का संदेश दिया।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

पिपलानी रामलीला में श्रवण प्रसंग और नारद मोह का मंचन एक धार्मिक नाट्य कार्यक्रम है, जिसमें रामचरितमानस के महत्वपूर्ण प्रसंगों को कलाकारों ने जीवंत किया। यह विषय रामकथा के मूल संदेशों—अहंकार, मोह, भक्ति और नियति—को दर्शकों तक पहुँचाने पर केंद्रित है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सांस्कृतिक परंपरा को पुनर्जीवित कर रही है और ग्रामीण समुदाय में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ा रही है। ऐसे मंचनों से आम जनता में धार्मिक मूल्यों के प्रति जागरूकता, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान की भावना को मजबूती मिल सकती

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Santosh Yogi

संतोष योगी भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं जो भोपाल जिला एवं आसपास की घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं।