अपराध

पितरों का तर्पण करने गयाजी, प्रयागराज और काशी जत्था रवाना:105 जरूरतमंदों को नि:शुल्क यात्रा पर रवाना किया, टिकट और सामग्री भेंट की

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 27 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
पितरों का तर्पण करने गयाजी, प्रयागराज और काशी जत्था रवाना:105 जरूरतमंदों को नि:शुल्क यात्रा पर रवाना किया, टिकट और सामग्री भेंट की

पितृपक्ष को लेकर सागर में रामसरोज समूह ने लगातार पांचवें वर्ष नि:शुल्क गयाजी तर्पण और पिंडदान यात्रा भेजी है। माता-पिता की स्मृति में आयोजित इस सेवा-समर्पित पहल के तहत शहर और आसपास के जरूरतमंद परिवारों को प्रयागराज, काशी और गयाजी अपने पितरों के तर्पण के लिए भेजा जा रहा है। जिसके तहत शनिवार को पंडित विपिन बिहारी और नर्मदा भक्त केशव गोस्वामी महाराज की उपस्थिति में वेदों मंत्र उच्चारण के साथ टिकट और सहयोग राशि भेंट कर यात्रियों 105 को रवाना किया गया।

इस दौरान रामसरोज समूह के सदस्यों ने संतों का शॉल, श्रीफल, रुद्राक्ष की माला बाबा खाटू श्याम का छायाचित्र और गाय की मूर्ति भेंट की। पंडित विपिन बिहारी ने कहा कि पितरों का तर्पण और स्मरण हमारी सनातन संस्कृति की रीढ़ है। आज की इस भौतिकवादी युग में जहां लोग अपनों के लिए समय नहीं निकाल पाते, वहीं रामसरोज समूह ने समाज के उन बेसहारा और जरूरतमंद परिवारों का हाथ पकड़ा है जो आर्थिक तंगी या अन्य अभावों के कारण गयाजी नहीं जा सकते थे।

121 कुलों के तर्पण का यह संकल्प केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज के प्रति सच्ची मानवीय सेवा और पितृ ऋण से मुक्ति का मार्ग है। नर्मदा भक्त केशव गोस्वामी महाराज ने कहा कि 5 सालों से पिंडदान के लिए लोगों को भेज रहे रामसरोज समूह के सदस्य संजीव केशरवानी ने कहा हमारे माता-पिता का सपना हमेशा से समाज सेवा का रहा था।

उनकी प्रेरणा से शुरू हुई यह यात्रा आज पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। जब हम देखते हैं कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है और जो तर्पण कराने में असमर्थ थे, उनके चेहरों पर गयाजी में पिंडदान के बाद जो संतोष और शांति दिखती है, वही हमारी सच्ची पूंजी है। शैलेश केशरवानी ने कहा कि इस यात्रा में जाति, धर्म या उम्र का कोई बंधन नहीं रखा गया।

हमारा उद्देश्य सिर्फ इतना था कि हर उस व्यक्ति के पितरों को मोक्ष मिले जिनके परिवार साधनहीन हैं। समाजसेवी अखिलेश मोनी केशरवानी ने कहा कि प्रयागराज के संगम स्नान से शुरू हुई यह आध्यात्मिक यात्रा काशी विश्वनाथ के दर्शन और अंत में गयाजी में विधि-विधान से तर्पण पर पूरी होती है विद्वान पंडितों के सानिध्य में हुए इन अनुष्ठानों से न केवल पितृ तृप्त होते हैं, बल्कि हमें भी असीम ऊर्जा और पुण्य की प्राप्ति हुई है।

इस दौरान बबीता संजीव केशरवानी, गीता शैलेश केशरवानी, श्वेता अखिलेश मोनी केशरवानी, ब्रह्माकुमारी मोनिका, समाजसेवी निवेदिता रत्नाकर, पूनम पटेल, प्रीति सिंह, प्रीतिमा अरजारिया संजीवनी, भारती नवीन केसरवानी, स्नेहलता साहू, रिचा सिंह, प्रीति केसरवानी, शालिनी तिवारी समेत अन्य मौजूद रहे।

📡 स्रोत: NewsData.io

📰 पूरी खबर पढ़ें (NewsData.io पर जाएं)

🎙️ जनता का संदेश का मत

गयाजी, प्रयागराज और काशी की यात्रा से न केवल पितरों की यादें ताज़ा होती हैं, बल्कि समाज में सहानुभूति और एकजुटता की भावना भी जागृत होती है। जब जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त यात्रा और भेंट मिलती है, तो यह दिखाता है कि दया और सेवा का कोई सीमाएँ नहीं होतीं। इस पहल से प्रेरित होकर हम सभी को चाहिए कि हम अपने समाज के कमजोर वर्गों की सहायता करें, चाहे वह आर्थिक हो या भावनात्मक, ताकि हम एक सशक्त और सहानुभूतिपूर्ण समाज का निर्माण कर सकें।

J
JKS News Desk

जनता का संदेश की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।