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प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन में भारत का योगदान वैश्विक औसत के आधे से भी कम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन में भारत का योगदान वैश्विक औसत के आधे से भी कम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन में भारत का योगदान वैश्विक औसत के आधे से भी कम है। आज नई दिल्ली में पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए श्री मोदी ने कहा कि विकासशील देशों को अक्सर कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है जोकि अनुचित है।

उन्होंने कहा कि भारत जी-20 का एकमात्र ऐसा देश है जिसने पेरिस में आयोजित कॉप-21 शिखर सम्मेलन में की गई प्रतिबद्धताओं को समय से पहले सफलतापूर्वक पूरा किया है। श्री मोदी ने कहा कि पिछले बारह वर्षों में भारत ने पर्यावरण से संबंधित हर क्षेत्र में असाधारण प्रगति की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत दुनिया के अन्य देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन और मिशन लाइफ जैसी पहलों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के नए मानक स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का प्रमुख ध्यान नवीकरणीय ऊर्जा पर रहा है और इसने पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

श्री मोदी ने कहा कि भारत आज स्वच्छ परिवहन और हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की पवन ऊर्जा क्षमता में तीन गुना वृद्धि हुई है। श्री मोदी ने कहा कि नया भारत, परमाणु ऊर्जा उत्पादन पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।

इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश न्‍यायामूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि पर्यावरण संबंधी न्यायाधिकरणों, नियामक तंत्रों और अनुपालन ढांचों के अस्तित्व में आने से बहुत पहले ही देश में पृथ्वी संरक्षण का विचार मौजूद था।

उन्होंने वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसमें सुधार करने तथा जीवित प्राणियों के प्रति करुणा रखने के प्रत्येक नागरिक के मौलिक कर्तव्य के महत्व का उल्‍लेख किया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारत का संविधान केवल एक राजनीतिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह अतीत, वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के प्रति एक नैतिक प्रतिबद्धता भी है।

इस अवसर पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि पर्यावरण के प्रति भारत का दृष्टिकोण उसकी प्राचीन सभ्यतागत विचारधारा में गहराई से निहित है, जो पृथ्वी को संपत्ति नहीं बल्कि एक साझा विरासत और पवित्र धरोहर मानती है। उन्होंने कहा कि भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता में अब गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों का योगदान 54 प्रतिशत से अधिक है, जो पूर्व निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक है।

श्री यादव ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है और सौर ऊर्जा विकास के मामले में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। श्री यादव ने आगे कहा कि ये उपलब्धियां दर्शाती हैं कि आर्थिक विकास और जलवायु परिवर्तन के प्रति दृढ़ संकल्प साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।

वन्यजीव संरक्षण के बारे में श्री यादव ने कहा कि भारत के प्रयास केवल कुछ पशुओं की रक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका उद्देश्य संपूर्ण पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि बाघ, शेर और हाथी जैसी प्रमुख प्रजातियों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि गिद्धों और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के प्रयास भी तेज किए जा रहे हैं। श्री यादव ने वनों, घास के मैदानों और आर्द्रभूमि के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए भारत द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय सम्मेलन पर्यावरण विशेषज्ञों, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों और जिला न्यायालयों के न्यायाधीशों को एक साथ ला रहा है। इसमें 17 देशों के प्रतिष्ठित न्यायाधीश और न्यायिक प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं।

यह सम्मेलन न्यायिक दृष्टिकोण, वैज्ञानिक ज्ञान, पर्यावरण शासन पद्धतियों और संस्थागत अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करेगा। सम्मेलन के दौरान, प्रतिभागी नीति निर्माण, कार्यान्वयन और प्रवर्तन में कमियों सहित प्रमुख पर्यावरणीय और जलवायु चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। सम्मेलन में पर्यावरण संबंधी शासन और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के तौर-तरीकों पर भी विचार किया जाएगा।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।