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प्रोजेक्ट शिशु जैसी योजनाओं को पूरे देश में लागू करने की जरूरत- सीजेआई

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 3 नवंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
प्रोजेक्ट शिशु जैसी योजनाओं को पूरे देश में लागू करने की जरूरत- सीजेआई

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत पहुंचे देवघर, झालसा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में की शिरकत, कहा- झारखंड में बच्चों के संरक्षण, शिक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए संचालित प्रोजेक्ट शिशु जैसी योजनाओं को पूरे देश में लागू करने की जरूरत।

Short Headline: प्रोजेक्ट शिशु जैसी योजनाओं को पूरे देश में लागू करने की जरूरत- सीजेआई

03 नवंबर, देवघर: भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा है कि झारखंड में बच्चों के संरक्षण, शिक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए संचालित प्रोजेक्ट शिशु जैसी योजनाओं को पूरे देश में लागू करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि न्याय का वास्तविक अर्थ केवल अदालतों तक पहुंचना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को उसके अधिकारों और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना है। मुख्य न्यायाधीश सोमवार को देवघर सिविल कोर्ट परिसर में आयोजित राज्यस्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तिकरण शिविर को संबोधित कर रहे थे।

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार यानी झालसा, जिला विधिक सेवा प्राधिकार देवघर और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह सहित झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं अन्य न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि किसी वृद्ध महिला को उसकी रुकी हुई पेंशन मिलना, किसी श्रमिक को उसकी मेहनत की मजदूरी प्राप्त होना, किसी बच्चे को शिक्षा जारी रखने का अवसर मिलना और किसी पीड़ित परिवार को समय पर सहायता उपलब्ध होना भी न्याय की महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति है। उन्होंने विधिक सेवा संस्थाओं से आग्रह किया कि वे जरूरतमंद लोगों तक स्वयं पहुंचें और उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान सुनिश्चित करें।

मुख्य न्यायाधीश ने झारखंड की सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं के माध्यम से विधिक जागरूकता फैलाने पर जोर दिया। उन्होंने पैरा लीगल वॉलंटियर्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विधिक सहायता का लाभ समाज के हर जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने सैनिकों और उनके परिवारों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई वीर परिवार सहायता योजना और लंबित विवादों के आपसी सहमति से समाधान के लिए चलाए जा रहे मेडिएशन फॉर द नेशन अभियान का भी उल्लेख किया।

कार्यक्रम में न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने झारखंड में संचालित प्रोजेक्ट शिशु की सराहना करते हुए कहा कि इस परियोजना के माध्यम से अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को विधिक सहायता, संरक्षण और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। वहीं, न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने मेडिएशन फॉर द नेशन अभियान और वीर परिवार सहायता योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी पहलों की सराहना की।

इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वर्चुअल माध्यम से पलामू स्थित भीष्म नारायण सिंह विधि महाविद्यालय और रांची स्थित सरला बिरला विश्वविद्यालय में स्थापित विधिक सहायता क्लीनिक का उद्घाटन भी किया। इन क्लीनिकों के माध्यम से लोगों को कानूनी अधिकारों की जानकारी और विधिक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

शिविर के दौरान विभिन्न सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत चयनित लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों और सहायता राशि का वितरण किया गया। कार्यक्रम में कुल 1,880 लाभुकों के बीच 14 करोड़ 46 लाख 90 हजार रुपये की राशि वितरित की गई। इसमें विभिन्न योजनाओं के लाभ के साथ चेक के माध्यम से सहायता और पीड़ितों को प्रतिकर राशि भी प्रदान की गई। इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद और वंचित परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करना तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग देना है।

झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एवं झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष सुजीत नारायण प्रसाद ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि शिविर का उद्देश्य विधिक अधिकारों की जानकारी को वास्तविक सहायता और सरकारी योजनाओं के लाभ से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति जानकारी, दस्तावेज या उचित मार्गदर्शन के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित नहीं रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने शिविर के बाद भी लंबित आवेदनों की समीक्षा और लाभुकों को सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर निगरानी रखने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम के अंत में न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस राज्यस्तरीय शिविर के माध्यम से न्यायपालिका, विधिक सेवा प्राधिकार और जिला प्रशासन ने समन्वित प्रयासों से जरूरतमंदों तक न्याय, सामाजिक सुरक्षा और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का संदेश दिया।

बाइट- सूर्यकांत, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।