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पूर्व अर्द्ध सैनिकों ने मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, लगाया भेदभाव का आरोप

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 27 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
पूर्व अर्द्ध सैनिकों ने मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, लगाया भेदभाव का आरोप

12 से 18 नवंबर तक भूख हड़ताल का किया ऐलान

अक्तूबर 27, शिमला (हिमाचल प्रदेश): अलाईंस ऑफ़ ऑल एक्स पैरा मिलिट्री फोर्सेस एसोसिएशन ने केंद्र सरकार पर सौतेले व्यवहार के आरोप लगाते हुए आर पार की लड़ाई का एलान करते हुए दिल्ली में भूख हड़ताल एलान कर दिया है।पूर्व अर्द्ध सैनिकों ने शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि उनकी विभिन्न मांगे लंबे समय से लंबित पड़ी है।

पुरानी पेंशन बहाली, समयबद्ध पदोन्नति और पुनर्वास लेकिन इस पर आज तक कोई गौर नहीं फरमाया गया। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए आगामी 12 से 18 नवंबर तक नई दिल्ली में सांकेतिक भूख हड़ताल करने की घोषणा की है, जिसमें विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में पूर्व अर्द्ध सैनिक और उनके परिवार हिस्सा लेंगे।

ढाई दिन के सांसद को पेंशन लेकिन सरहद पर खड़े और देश के लिए अपना जीवन न्योच्छावर करने वाले को पेंशन नहीं ? यह कहाँ का इंसाफ, जबकि सब जगह पैरा मिलिट्री फोर्सेस के जवान खड़े रहते हैं चाहे दंगे हो या प्रदर्शन या देश की सरहद। उन्होंने कहा कि हमने यूपीएस वाली पेंशन नहीं मांगी थी, हमारे लिए अलग नियम होने चाहिए।

एक्स पैरा मिलिट्री फोर्सेस वेल्फेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कड़े शब्दों में कहा कि हम अर्द्ध सैनिक आए दिन राष्ट्र के लिए शहीद होते रहते हैं, तो फिर शहादत में भेदभाव क्यों?सरकार ने सीपीएफ (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट 2026' पारित करवा दिया, जिससे 13 हजार कैडर अधिकारियों की समयबद्ध पदोन्नति पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

पत्रकार वार्ता के दौरान वीएस कदम ने कहा कि यही हाल देश के 11 लाख पैरा मिलिट्री जवानों का भी है, जहाँ दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 11 जनवरी 2023 को पुरानी पेंशन बहाली के पक्ष में सुनाए गए फैसले के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई है और अभी सुनवाई का इंतजार है। एसोसिएशन ने मांग की है कि केंद्रीय अर्द्ध सैनिक बलों के लाखों सेवारत एवं सेवानिवृत्त जवानों को दीपावली का तोहफा देते हुए यह पुन: वेतन-पेंशन निर्धारण जल्द पूरा किया जाए।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।