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प्याज के भाव ने बदली किसानों की किस्मत:झालवाड़ में 44 रुपए किलो तक दाम, खेत से सीधे दिल्ली तक डिमांड

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 2 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
प्याज के भाव ने बदली किसानों की किस्मत:झालवाड़ में 44 रुपए किलो तक दाम, खेत से सीधे दिल्ली तक डिमांड

झालावाड़ जिले में प्याज के दाम बढ़ने से किसानों को इस साल बड़ी राहत मिली है। पिछले साल कम भाव मिलने पर किसानों को प्याज सड़कों पर छोड़ने की नौबत आ गई थी, लेकिन इस बार करीब एक महीने से 38 से 44 रुपए प्रति किलो तक का भाव मिल रहा है। मंडी में यही प्याज 50 से 60 रुपए किलो तक बिक रहा है।

किसानों को प्रति किलो करीब 30 रुपए तक का फायदा हो रहा है। अच्छे भाव को देखते हुए किसान पूरी उपज एक साथ बेचने के बजाय जरूरत के हिसाब से धीरे-धीरे प्याज बाजार में निकाल रहे हैं। वहीं, व्यापारी खेतों और गांवों से ही प्याज खरीदकर दूसरे बाजारों तक भेज रहे हैं। छह महीने में तैयार होती है फसल, सात बार सिंचाई प्याज की खेती किसानों के लिए मेहनत और लागत वाली फसल है।

एक बीघा जमीन में करीब 50 से 75 क्विंटल तक उत्पादन होता है और फसल तैयार होने में करीब छह महीने लगते हैं। इस दौरान करीब सात बार सिंचाई के साथ दवा का छिड़काव, निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण करना पड़ता है। पहले बीज तैयार किया जाता है और इसके बाद पौध की रोपाई होती है। मौसम और फसल की स्थिति पर किसान लगातार नजर रखते हैं।

अच्छा भाव मिला तो खेत से ही खरीद ले जाते हैं व्यापारी इस बार किसानों को मंडी तक उपज पहुंचाने की परेशानी भी कम हो रही है। स्थानीय व्यापारी और खरीददार खेतों से ही प्याज खरीद रहे हैं। इससे किसानों का परिवहन खर्च और अतिरिक्त मेहनत बच रही है। बाजार में भाव बेहतर होने के कारण किसान भी अपनी पूरी उपज एक साथ बेचने के बजाय थोड़ा-थोड़ा निकाल रहे हैं।

इससे उन्हें आगे भी अच्छे भाव मिलने की उम्मीद है। भाव कमजोर हो तो भंडारण का सहारा अप्रैल के आसपास फसल तैयार होने के बाद किसान बाजार के भाव के अनुसार बिक्री का फैसला करते हैं। भाव अच्छा हो तो स्थानीय स्तर पर बेच देते हैं, जबकि भाव कमजोर होने पर प्याज का भंडारण कर लेते हैं। कई किसान अपनी उपज कोटा मंडी तक ले जाते हैं।

वहां अपेक्षित भाव नहीं मिलने पर प्याज को मध्यप्रदेश के शाजापुर सहित अन्य मंडियों में भेजा जाता है। कोटा से शाजापुर और दिल्ली तक पहुंच रही उपज झालावाड़ के प्याज की मांग स्थानीय बाजार के अलावा दूसरे राज्यों में भी है। किसानों और व्यापारियों के अनुसार शाजापुर क्षेत्र के व्यापारी प्याज को आगे इंदौर तक भेजते हैं।

वहीं झालावाड़ क्षेत्र से खरीदा गया प्याज गाड़ी भरने के बाद दिल्ली की आजादपुर मंडी तक पहुंचाया जा रहा है। यानी खेत से निकलने वाली उपज स्थानीय बाजार के साथ कोटा, मध्यप्रदेश और दिल्ली तक पहुंच रही है। होटल-रेस्टोरेंट में भी प्याज की मांग पर असर झालावाड़ शहर निवासी अशफाक भाई ने बताया कि प्याज के भाव बढ़ने का असर होटल और रेस्टोरेंट में भी दिखाई दे रहा है।

उनके अनुसार कई जगह सलाद में प्याज कम मात्रा में दिया जा रहा है या मांग के बाद ही दिया जा रहा है। कुछ होटल-रेस्टोरेंट में इसके लिए अतिरिक्त चार्ज भी लिया जा रहा है, जबकि सामान्य तौर पर सलाद में प्याज निशुल्क दिया जाता है। रायपुर-बकानी समेत कई क्षेत्रों में होती है खेती जिले में रायपुर, बकानी, झालरापाटन, सुनेल, भवानीमंडी, अकलेरा और असनावर सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्याज की खेती होती है।

प्याज यहां किसानों की महत्वपूर्ण नकदी फसल है। किसानों को अच्छे भाव मिलने से आगामी सीजन में इसका रकबा बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। तीन साल नुकसान के बाद इस बार किसानों को राहत भारतीय किसान संघ के जिला प्रचार प्रमुख महेश मेहर ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से प्याज उत्पादक किसानों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा था, इसके बावजूद किसानों ने खेती जारी रखी।

इस साल अच्छे भाव मिलने से किसानों को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि यदि आने वाले समय में भी भाव इसी तरह बने रहे तो अगले सीजन में किसान अधिक क्षेत्र में प्याज की बुवाई कर सकते हैं। अच्छे भाव का असर प्याज के बीज की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। 800 भंडारण संरचनाएं बनीं, 50% तक अनुदान झालावाड़ उद्यान विभाग के अधिकारी सुभाष शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत प्याज के सुरक्षित भंडारण के लिए संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है।

जिले में अब तक करीब 800 भंडारण संरचनाएं बन चुकी हैं। इनके निर्माण पर सरकार की ओर से 50 प्रतिशत खर्च अनुदान के रूप में दिया जाता है। उन्होंने बताया कि पिछली बार तीन सीजन में करीब 2300 हेक्टेयर में प्याज की बुवाई हुई थी, जबकि इस साल अब तक 3000 हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य रखा गया है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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