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राहुल प्रियंका ने पुलिस का प्लान कैसे फेल किया:हिरासत के लिए बस में बैठाया, तो उतरकर आकाशवाणी ऑफिस में घुसे; 8 घंटे डटे रहे

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 7 अक्टूबर 2026 👁️ 3 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
राहुल प्रियंका ने पुलिस का प्लान कैसे फेल किया:हिरासत के लिए बस में बैठाया, तो उतरकर आकाशवाणी ऑफिस में घुसे; 8 घंटे डटे रहे

SIR के विरोध में मंगलवार को विपक्ष चुनाव आयोग तक सेव डेमोक्रेसी मार्च निकाल रहा था। पुलिस ने रास्ता रोका, बैरिकेड लगाए और नेताओं को बसों में बैठाकर प्रदर्शन खत्म कराने की तैयारी की। तभी तस्वीर बदल गई। राहुल-प्रियंका गांधी अचानक बस से उतरे गए और आकाशवाणी भवन के अंदर घुस गए। दोनों परिसर के अंदर बरगद के पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए और पुलिस के प्लान को फेल कर दिया।

जो धरना कुछ घंटों में खत्म होने वाला था, वह शाम 8 बजे तक चला। पुलिस को कांग्रेसियों को हटाने में 8 घंटे से ज्यादा का वक्त लग गया। सिलसिलेवार पढ़िए राहुल-प्रियंका ने पुलिस का प्लान कैसे फेल किया? 12:20 बजे: राहुल ने अचानक प्लान बदला, किसी को नहीं थी जानकारी यहीं से कहानी पलटी। प्रियंका पहले से पुलिस की बस में बैठी थीं।

राहुल भी बस में जाने वाले थे, लेकिन उन्होंने प्रियंका से बात की और अचानक आकाशवाणी भवन के रिसेप्शन गेट की तरफ बढ़ गए। उनके पीछे इमरान प्रतापगढ़ी, केसी वेणुगोपाल, दीपेंद्र हुड्डा, पवन खेड़ा, कुमारी शैलजा भी पीछे-पीछे आ गईं। गेट पर राहुल को गार्ड ने रोका तो वह भड़क गए और धक्का देकर अंदर घुस गए।

इसके बाद वहीं बरगद के पेड़ के नीचे प्रियंका के साथ धरने पर बैठ गए। राहुल के इस एक्शन की जानकारी कांग्रेसी नेताओं को नहीं थी।

पुलिस ने 3 से ज्यादा बार हटने की अपील, राहुल नहीं माने पुलिस ने राहुल और प्रियंका से आकाशवाणी परिसर से हटने के लिए 3 से ज्यादा बार अपील की। दोपहर 12:30 बजे उनसे परिसर खाली करने को कहा। राहुल ने जवाब दिया कि अगर उन्हें हटाना है, तो पहले यह बताया जाए कि वे विरोध करने के लिए कहां बैठ सकते हैं।

करीब एक घंटे बाद फिर DCP सचिन शर्मा समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहुल-प्रियंका समेत नेताओं को वहां से हटाने की कोशिश की, लेकिन वे कामयाब नहीं हुए। इस रणनीति के पीछे 2 बड़े संदेश राहुल ने ऐसा ही सीक्रेट प्लान PM आवास पर प्रदर्शन के दौरान बनाया था राहुल ने NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पीएम आवास के पास धरना दिया था।

तब भी प्रदर्शन इतना सीक्रेट रखा था कि पुलिस को भनक नहीं लगी। राहुल ने खड़गे के जन्मदिन के बहाने विपक्षी सांसदों और नेताओं को उनके घर बुलाया था। सुरक्षा एजेंसियों और मीडिया को यही लगा कि नेता केवल खड़गे को जन्मदिन की शुभकामनाएं

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर राहुल और प्रियंका गांधी द्वारा पुलिस के द्वारा आयोजित बस में बैठाकर प्रदर्शन समाप्त करने के प्रयास को विफल करने की घटना पर आधारित है। यह घटना राजनीतिक विरोध और पुलिस की रणनीति के बीच संघर्ष को दर्शाती है। इस खबर का महत्व इसलिए है क्योंकि यह दिखाती है कि विपक्षी नेता कैसे योजनाबद्ध तरीकों से पुलिस की योजनाओं को चुनौती देते हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर चर्चा होती है। आम जनता के लिए यह घटना नागरिक अधिकारों, राजनीतिक स्वतंत्रता और पुलिस की कार्यवाही के बीच संतुलन पर सवाल उठाती है, जि

🎙️ जनता का संदेश का मत

राहुल‑प्रियंका के साहस ने दिखाया कि संघर्ष का मार्ग हमेशा हिंसा नहीं होता। जब पुलिस ने रास्ता रोका, तो वे शांति से आकाशवाणी भवन के अंदर जाकर धरने पर बैठकर योजना को फेल कर दिया। यह उदाहरण हमें सिखाता है कि असहमति में भी संयम और संवाद का रास्ता चुनना चाहिए। संघर्ष के समय शांतिपूर्ण जुटान से समाज में विश्वास और सहिष्णुता बढ़ती है, जिससे सभी को लाभ होता है।

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