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राजस्थानी रामलीला की रिहर्सल

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 5 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
राजस्थानी रामलीला की रिहर्सल

राजस्थानी भाषा को मजबूती दे रही रामलीला

सूरतगढ़, 5 अक्टूबर। राजस्थानी भाषा, साहित्य और संस्कृति के इतिहासविद एवं शिक्षाविद डॉ. राजवीर सिंह चलकोई ने सूरतगढ़ स्थित राजस्थानी रामलीला संस्थान पहुंचकर रामलीला की रिहर्सल देखी और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। इस दौरान राजस्थानी भाषा आंदोलन और भाषा को राजभाषा का दर्जा दिलाने को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। अपने 12वें वर्ष में प्रवेश कर रही राजस्थानी रामलीला का लेखन साहित्यकार एवं भाषाविद मनोज कुमार स्वामी ने किया है। रामलीला के माध्यम से राजस्थानी भाषा, लोककला, संस्कृति और परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

रिहर्सल के दौरान कलाकारों ने रावण-सीता, रावण-अंगद, राम-हनुमान, रावण-नंदी तथा मकरध्वज-मंथरा संवादों का मंचन किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों को देखकर डॉ. राजवीर सिंह चलकोई ने रामलीला के प्रयासों की सराहना की और कहा कि राजस्थानी भाषा एवं संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

डॉ. चलकोई ने राजस्थान सरकार से संविधान के अनुच्छेद 345 के तहत राजस्थानी को राजभाषा का दर्जा देने तथा केंद्र सरकार से राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए सामाजिक स्तर पर निरंतर प्रयास जरूरी हैं। इस अवसर पर मूर्तिकार महावीर भारती, भूपेंद्र सिंह सिणली, संस्थान के संरक्षक मुरलीधर उपाध्याय, मनोज कुमार स्वामी, भंते निब्बान पथिक, डॉ.

गौरीशंकर निमिवाल, कन्हैयालाल पारीक, एडवोकेट जयप्रकाश बलानी, ओमप्रकाश स्वामी सहित रामलीला से जुड़े कलाकार मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में प्रमोद बिश्नोई ने अतिथियों और कलाकारों का आभार व्यक्त किया।

बाइट :

  1. डॉ. राजवीर सिंह चलकोई , शिक्षाविद एवं इतिहासकार
  2. मनोज कुमार स्वामी ,सृजक
  3. भंते निब्बान पथिक,संचालक
  4. महावीर भारती, मूर्तिकार
  5. देव भारती, कलाकार
  6. धीरेन स्वामी,बाल कलाकार
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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।