राज्यपाल ने ‘कौटिल्य के अर्थशास्त्र में मानवाधिकार’ पुस्तक का किया विमोचन
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पुस्तक में शासन व्यवस्था एवं समकालीन संदर्भों में मानवाधिकारों का सारगर्भित विश्लेषणः राज्यपाल
राज्यपाल ने ‘कौटिल्य के अर्थशास्त्र में मानवाधिकार’ पुस्तक का किया विमोचन
सितंबर 22, शिमला (हिमाचल प्रदेश): राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज लोकभवन में ‘कौटिल्य के अर्थशास्त्र में मानवाधिकार’ पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. जयंत कुमार शर्मा द्वारा लिखी गई है। लेखक के प्रयासों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि डॉ. जयंत कुमार शर्मा ने राज्य, शासन व्यवस्था तथा विज्ञान से जुड़े विभिन्न पहलुओं के संदर्भ में मानवाधिकारों का गहन अध्ययन किया है और उनके संरक्षण के लिए आवश्यक सिद्धान्तों एवं उपायों का व्यापक एवं सार्थक विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
राज्यपाल ने कहा कि यह पुस्तक आधुनिक युग में मानवाधिकारों की स्थिति एवं उनके विकास पर भी महत्वपूर्ण प्रकाश डालती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक शासन व्यवस्था एवं समाज के संदर्भ में मानवाधिकारों की प्रासंगिकता को बेहतर तरीके से समझने में उपयोगी सिद्ध होगी। राज्यपाल ने साहित्य एवं अकादमिक विमर्श के क्षेत्र में डॉ.
जयंत कुमार शर्मा के योगदान की सराहना की तथा आशा व्यक्त की कि वे भविष्य में भी इसी समर्पण एवं प्रतिबद्धता के साथ अपने साहित्यिक एवं विद्वत्तापूर्ण कार्यों को आगे बढ़ाते रहेंगे। इस अवसर पर डॉ. प्रेम लाल गौतम ने अपनी पुस्तकें ‘चेतना के उन्मेष’ और ‘कल्याणी’ राज्यपाल को भेंट कीं। इस अवसर पर राजेन्द्र भारद्वाज, अमिता भारद्वाज और विमला शर्मा भी उपस्थित थीं।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
कौटिल्य के अर्थशास्त्र में मानवाधिकार एक ऐसी पुस्तक है जो प्राचीन भारतीय रणनीतिकार कौटिल्य के आर्थिक सिद्धांतों को आधुनिक मानवाधिकारों के संदर्भ में जोड़ती है। यह विषय आर्थिक नीति और मानव अधिकारों के संगम पर नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता द्वारा विमोचन की खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शिमला के सार्वजनिक कार्यक्रमों में उच्च स्तर की भागीदारी और राज्य की शिक्षा एवं मानव अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि लोग आर्थिक नीतिय