'राम जन्मभूमि मंदिर सचमुच उसी जगह, जांच हो', याचिका पर SC बोला- 'सिविल कोर्ट जाइए'
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सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण की जगह को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है.
याचिका में सवाल उठाया गया था कि क्या राम जन्मभूमि मंदिर वास्तव में उसी जमीन पर बनाया गया है, जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में आदेश दिया था.
याचिकाकर्ता ने अदालत से जमीन के रिकॉर्ड और दूसरे दस्तावेजों के आधार पर इसकी पुष्टि करने की मांग की थी.
जमीन की जांच के लिए सिविल कोर्ट जाने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अगर जमीन के रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर इस मामले की जांच कराना चाहता है तो वह सिविल कोर्ट का रुख कर सकता है.
अदालत के मुताबिक, जमीन से जुड़े ऐसे विवाद की सुनवाई सीधे सुप्रीम कोर्ट में नहीं की जा सकती.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में तथ्यों और जमीन के दस्तावेजों की जांच के लिए उचित कानूनी रास्ता सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर करना है.
जमीन के नक्शे और पुराने रिकॉर्ड की जांच की मांग
इससे पहले याचिकाकर्ता ने जमीन की वास्तविक सीमाओं, निर्देशांकों, क्षेत्रफल और स्थान की पहचान करने के लिए स्वतंत्र सर्वे कराने की मांग की थी.
इसके साथ ही केंद्र सरकार, संबंधित अधिकारियों और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मंदिर परिसर से जुड़े सभी मूल दस्तावेज, नक्शे, योजनाएं और सर्वे रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और अदालत के सामने पेश करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था.
याचिका में यह भी कहा गया कि अगर जांच के दौरान 2019 के फैसले में तय जमीन और मंदिर के निर्माण वाली जगह के बीच कोई महत्वपूर्ण अंतर सामने आता है तो उसे दूर करने के लिए उचित निर्देश दिए जाएं.
2019 में सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था ऐतिहासिक फैसला
दरअसल, 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने अयोध्या विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था.
अदालत ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला को देने का आदेश दिया था.
साथ ही केंद्र सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का निर्देश दिया था.
इसके बाद राम मंदिर
📡 स्रोत: ABP Live