'राम मंदिर उसी जगह, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने दिया था':इसकी जांच की मांग वाली याचिका को SC ने खारिज किया, कहा- सिविल कोर्ट जाइए
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सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की जगह को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। सोमवार को कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह इस मामले में सिविल कोर्ट जाएं। याचिका में सवाल उठाया गया था कि क्या राम मंदिर उसी जमीन पर बना है, जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में आदेश दिया था।
याचिकाकर्ता ने जमीन के रिकॉर्ड और दूसरे दस्तावेजों के आधार पर इसकी पुष्टि कराने की मांग की थी। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट से एक स्वतंत्र समिति या आयोग बनाने की अपील की गई थी। इसमें सर्वे, राजस्व, पुरातत्व और अन्य तकनीकी क्षेत्रों के योग्य विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई थी। 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की पीठ ने अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सर्वसम्मति से फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट को सौंपने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में किसी 'प्रमुख' जगह पर नई मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ की वैकल्पिक जमीन दे। 22 जनवरी 2024 को हुई थी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा भूमि पूजन के साथ राममंदिर का निर्माण 5 अगस्त 2020 को शुरू हुआ था। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की देखरेख में मंदिर के गर्भगृह और पहले तल का निर्माण होने के बाद 22 जनवरी 2024 के इसमें श्रीराम के बाल रूप के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा की गई।
इस ऐतिहासिक समारोह में PM मोदी मुख्य यजमान के रूप में थे। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद राम मंदिर को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। मस्जिद के लिए जमीन मिली, अब तक एक ईंट तक नहीं रखी गई बाबरी मस्जिद की जगह नई मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या से 25 किलोमीटर दूर धन्नीपुर में 5 एकड़ जमीन दी गई थी। इसके बाद मस्जिद निर्माण के लिए इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन बनाया गया।
अगस्त 2021 में फाउंडेशन ने लोगों से मदद की अपील की और बैंक खाते की जानकारी सार्वजनिक की। नवंबर 2022 तक ट्रस्ट को देशभर से करीब 40 लाख रुपए का डोनेशन मिला। हालांकि, अब तक मस्जिद निर्माण के लिए एक ईंट तक नहीं रखी गई है। मस्जिद के लिए मिली जमीन पर घास उग आई है। चारों ओर तारबंदी है और बच्चे वहां क्रिकेट खेलते हैं।
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📡 स्रोत: Dainik Bhaskar