रामगढ़ में 62 वर्षों से रास गरबा का हो रहा आयोजन, सामाजिक सद्भाव का मिसाल
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रामगढ़ में 62 वर्षों से चली आ रही रास गरबा की परंपरा, मां दुर्गा की आराधना में जुटा गुजराती समाज, गरबा-डांडिया के जरिए सामूहिक एकता का दिया संदेश, विश्व कल्याण और सुख-समृद्धि की कामना।
Short Headline: रामगढ़ में 62 वर्षों से रास गरबा का हो रहा आयोजन, सामाजिक सद्भाव का मिसाल
रास गरबा, रामगढ़, के.के.तिवारी
रामगढ़ में 62 वर्षों से रास गरबा की परंपरा
मां दुर्गा की आराधना में जुटा गुजराती समाज
गरबा-डांडिया के जरिए सामूहिक एकता का दिया संदेश
विश्व कल्याण और सुख-समृद्धि की कामना
एंकर
मां दुर्गा की आराधना के बीच राज्यभर में नवरात्र का उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। रामगढ़ में भी गुजराती समाज की ओर से रास गरबा और डांडिया का आयोजन किया गया। मां दुर्गा की आराधना के साथ आयोजित इस उत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता का संदेश दिखा।
होल्ड अप साउंड रिपोर्ट
वीओ 01. गुजराती समाज ने रामगढ़ में रास गरबा और डांडिया का आयोजन किया। आयोजक राजू रामगढ़िया ने बताया कि 62 वर्षों से अधिक पुरानी इस परंपरा में समाज के लोगों ने एकजुट होकर मां दुर्गा की आराधना की। पारंपरिक परिधानों में सजे श्रद्धालु डांडिया और तालियों की थाप पर गोल घेरे में गरबा की।
बाइट- राजू रामगढ़िया, आयोजक, गुजराती समाज, रामगढ़
वीओ 02.
गरबा महोत्सव में शामिल श्रद्धालु उपवास रखकर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं। उनकी कामना है कि मां की कृपा से सभी के जीवन में सुख-समृद्धि आए और विश्व का कल्याण हो। महिला श्रद्धालु रूपा मेहता ने बताया कि महिलाओं और युवतियों के लिए यह उत्सव आस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का भी है।
बाइट- रूपा मेहता, महिला श्रद्धालु, गुजराती समाज, रामगढ़
वीओ 03 नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में श्रद्धालु मां दुर्गा से सभी के सुख, शांति, विद्या, बुद्धि और समृद्धि की कामना करते हैं। गुजराती समाज की यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आस्था और संस्कृति को आगे बढ़ा रही है। रास गरबा रामगढ़ में धार्मिक उत्साह के साथ सामाजिक सद्भाव और सामूहिक एकता का भी परिचायक है।
बाइट- ऋचा कोटेचा, महिला श्रद्धालु, गुजराती समाज, रामगढ़
अंतिम वीओ संगीत और डांडिया की थाप पर एक साथ थिरकते लोग यह संदेश देते हैं कि त्योहार केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का माध्यम भी हैं।
रामगढ़ से के.के.तिवारी की रिपोर्ट।