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रांची के जैप-वन परिसर में गोरखा जवानों ने नौ कन्याओं के पूजन के साथ मां को दी पारंपरिक विदाई

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
रांची के जैप-वन परिसर में गोरखा जवानों ने नौ कन्याओं के पूजन के साथ मां को दी पारंपरिक विदाई

रांची के जैप-वन परिसर में गोरखा जवानों की अनूठी परंपरा, प्रतिमा की जगह कलश स्थापना कर की जाती है मां शक्ति की पूजा, गोरखा जवानों ने किए अपने अस्त्र-शस्त्रों के पूजन, नौ कन्याओं के पूजन के साथ मां को दी पारंपरिक विदाई।

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रांची के जैप-वन परिसर में गोरखा जवानों की अनूठी परंपरा

प्रतिमा की जगह कलश स्थापना कर की जाती है शक्ति की पूजा

गोरखा जवानों ने किए अपने अस्त्र-शस्त्रों के पूजन

नौ कन्याओं के पूजन के साथ मां को दी पारंपरिक विदाई

एंकर राजधानी रांची के डोरंडा स्थित झारखंड सशस्त्र पुलिस परिसर में गोरखा जवानों ने विधि-विधान के साथ अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा की और पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न किए। महानवमी के अवसर पर नव कन्याओं का पूजन भी किया गया।

होल्ड अप साउंड रिपोर्ट

वीओ 01. रांची के जैप-वन परिसर में नवकन्याओं के पूजन और अस्त्र-शस्त्रों की विशेष पूजा का अनुष्ठान संपन्न कराते हुए रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक सह जैप-वन के कमांडेंट राकेश रंजन ने कहा कि एक सिपाही के जीवन में उसके अस्त्र-शस्त्र ही सबसे सच्चे साथी होते हैं। इसी उद्देश्य और राष्ट्र की सुरक्षा की कामना के साथ आज मां भवानी के समक्ष विशेष पूजा-अर्चना की गई है।

वीओ 02. इस प्राचीन परंपरा के विषय में जानकारी देते हुए जैप-वन पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय वान थापा ने बताया कि गोरखा जवानों की यह दुर्गा पूजा अन्य आयोजनों से पूरी तरह भिन्न है। यहाँ माता की मूर्ति स्थापित करने के बजाय कलश रखकर शक्ति की उपासना की जाती है।

अंतिम वीओ राजधानी रांची के डोरंडा स्थित जैप-वन परिसर में वर्ष 1880 में गोरखा जवानों द्वारा शुरू की गई यह अनूठी परंपरा आज भी पूरी जीवंतता के साथ कायम है, जो अनुशासन, संस्कृति और अटूट आस्था का एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करती है।

रांची से प्रताप की रिपोर्ट।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

रांची के जैप-वन परिसर में गोरखा जवानों ने नौ कन्याओं के पूजन के साथ मां शक्ति की पारंपरिक विदाई की। यह परंपरा गोरखा सैनिकों के धार्मिक आस्था और मातृत्व के प्रति सम्मान को दर्शाती है, जहाँ वे अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा कर के मातृ देवी को समर्पित करते हैं। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक समरसता का उदाहरण देती है, जिससे समाज में परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ती है। आम जनता पर इसका असर सकारात्मक है, क्योंकि यह स्थानीय रीति-रिवाजों के प्रति गर्व और सम्मान जगाता ह

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।