रांची में जेसेवा दिवाली मेले में 300 से अधिक स्टॉल्स में दिखी पारंपरिकता और आत्मनिर्भरता की झलक
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रांची में जेसोवा दिवाली मेले का आज आखिरी दिन, 300 से अधिक स्टॉल्स में दिखी परंपरा, मेले में दिखी महिला सशक्तीकरण की झलक, स्थानीय उत्पादों की बढ़ी मांग।
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जेसोवा दिवाली मेला, रांची, डीडी
रांची में जेसोवा दिवाली मेले का आज आखिरी दिन
300 से अधिक स्टॉल्स में दिखी परंपरा मेले में दिखी महिला सशक्तीकरण की झलक
स्थानीय उत्पादों की बढ़ी मांग
एंकर दीपावली के त्योहार को खास बनाने और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रांची में आयोजित जेसोवा दिवाली मेले का आज आखिरी दिन है। यहां हस्तशिल्प, पारंपरिक कला और सजावटी सामान के जरिए वोकल फॉर लोकल, महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर देखने को मिल रही है।
होल्ड अप साउंड रिपोर्ट
वीओ 01. रांची के जेसोवा दिवाली मेले में पारंपरिक और आधुनिकता की झलक दिख रही है। तीन सौ से अधिक स्टॉल्स में स्थानीय कारीगरों, महिला उद्यमियों और कलाकारों को बाजार उपलब्ध कराया गया है। रांची की अनुभा भी महिलाओं के हाथों बने हैंडीक्राफ्ट उत्पाद लेकर पहुंची हैं। उन्होंने बताया कि ये उत्पाद दिपावली को खास बनाएंगे।
बाइट- अनुभा, महिला उद्यमी
वीओ 02. मेले में कला और शिल्प के विविध रूप भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। कहीं रेजिन आर्ट के खूबसूरत उत्पाद घरों की सजावट के लिए पसंद किए जा रहे हैं, तो कहीं झारखंड की पारंपरिक सोहराई पेंटिंग अपनी विशिष्ट पहचान के साथ लोगों का ध्यान खींच रही है।
बाइट- ध्वनि चौधरी, रेजिन आर्ट कलाकार बाइट- आकृति सफरवार, सोहराई पेंटिंग कलाकार
वीओ 03. दिपावली में घर को सजाने की पुरानी परंपरा रही है। इस अवसर पर लक्ष्मी गणेश की पूजा और इसके पूर्व धनतेरस में बर्तन तथा सामानों की खरीदारी की परंपरा भी है। मेले में हजारीबाग के ईचाक स्थित करियातपुर से पहुंचे नीतीश कुमार ने बताया के वे पारंपरिक बर्तन के काम को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके लिए उन्हें पीएम विश्वकर्मा योजना और एमएसएमई का सहयोग भी प्राप्त हुआ है।
बाइट- नीतीश कुमार, बर्तन कारोबारी
वीओ 04. जेसोवा दिवाली मेले में झारखंड की ग्रामीण संस्कृति की झलक भी लोगों को खूब लुभा रही है। मेले में तैयार गांव का दृश्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां लोग ग्रामीण परिवेश और पारंपरिक जीवनशैली को करीब से महसूस कर रहे हैं।
बाइट- अक्षय कुमार, मेला घूमने आए युवक बाइट- शीतल भेंगरा, छात्रा
अंतिम वीओ जेसोवा दिवाली मेला स्थानीय हुनर, पारंपरिक कला और महिला उद्यमिता को एक मंच देने का प्रयास है। यह आयोजन न केवल दीपावली की खुशियों को रंगीन बना रहा है, बल्कि वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।
रांची से सहयोगी विकास और सूरज के साथ प्रणय प्रबोध की रिपोर्ट।