रांची के मोरहाबादी मैदान में तैयार होगी दो मंजिला सोने की लंका
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विजयादशमी पर रांची के मोरहाबादी मैदान में जलेगा 70 फीट का रावण, दो मंजिला सोने की लंका और भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा आकर्षण का केन्द्र।
Short Headline: रांची के मोरहाबादी मैदान में तैयार होगी दो मंजिला सोने की लंका
17 अक्टूबर, रांची: विजयादशमी पर रांची के मोरहाबादी मैदान में रावण दहन कार्यक्रम को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस वर्ष रावण दहन के लिए 70 फीट ऊंचा रावण, 65 फीट का कुंभकर्ण और 60 फीट के मेघनाथ का पुतला बनाया गया है। इसके साथ ही काल्पनिक दो मंजिला सोने की लंका भी तैयार की जाएगी।
पंजाबी हिंदू बिरादरी की ओर से हर साल इस आयोजन को और भव्य बनाने के साथ विभिन्न समुदायों को जोड़ने का प्रयास किया जाता है। इसमें केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ और विधायक सी.पी.सिंह समेत कई नेता शामिल होंगे। इस वर्ष कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों के साथ धनबाद की विक्की छाबड़ा टीम सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देगी।
कार्यक्रम में श्रीराम दरबार, भगवान राम की जीवंत मूर्ति और रावण वध की जीवंत झांकी प्रस्तुत की जाएगी। टाटा की सन्नी ग्रुप टीम भांगड़ा नृत्य पेश करेगी। इसके अलावा कोलकाता की टीम की ओर से भव्य आकाशीय आतिशबाजी और बिहार के बक्सर जिले से आए आतिशबाजी की ओर से जमीन पर आतिशबाजी की जाएगी। इस बार विशेष लेजर शो भी आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेगा।
कार्यक्रम के दौरान राज अस्पताल और पंजाबी हिंदू बिरादरी की ओर से एंबुलेंस की व्यवस्था की जाएगी। आयोजन को सफल बनाने में रांची प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, अग्निशमन विभाग, सदर अस्पताल और अन्य संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा। पंजाबी हिंदू बिरादरी के अध्यक्ष कुणाल अजमानी ने आयोजन की जानकारी देते हुए प्रशासन, पुलिस, सहयोगी संस्थाओं, मीडिया और रावण दहन देखने पहुंचने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
बाइट- कुणाल आजमानी, अध्यक्ष, पंजाबी हिंदू बिरादरी
💡 पृष्ठभूमि (Background)
रांची के मोरहाबादी मैदान में इस वर्ष विजयादशमी पर 70 फीट ऊँचा रावण और दो मंजिला सोने की लंका जलाने की तैयारी हो रही है। यह कार्यक्रम धार्मिक परंपरा के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी हिस्सा है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शहर की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक उत्सव की परंपरा को दर्शाती है, और बड़े पैमाने पर लोगों को आकर्षित करती है। आम जनता के लिए यह एक आध्यात्मिक अनुभव और पर्यटन का अवसर बन सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और समाज में एकता व सांस्कृतिक गर्व की