रांची में विजयादशमी पर सिंदूर खेला की धूम
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राजधानी रांची के दुर्गाबाड़ी मंदिर में विजयादशमी के पावन अवसर पर बंगाली समुदाय की महिलाओं द्वारा 'सिंदूरदान' और 'सिंदूर खेला' की परंपरा पूरी भव्यता के साथ मनाई जाती है।
Short Headline: सुहागिन महिलाओं ने की अखंड सौभाग्य की कामना, बंगाली समुदाय के साथ अन्य समाज की महिलाओं ने भी लिया हिस्सा
एंकर राजधानी रांची के दुर्गाबाड़ी मंदिर में विजयादशमी के पावन अवसर पर बंगाली समुदाय की महिलाओं द्वारा 'सिंदूरदान' और 'सिंदूर खेला' की परंपरा पूरी भव्यता के साथ मनाई जाती है। इस पारंपरिक विधान का निर्वहन करते हुए आज दुर्गाबाड़ी में सुहागिन महिलाओं ने माता दुर्गा के चरणों में सिंदूर अर्पित किया और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्यवती होने की मंगलकामना की।
वॉयस ओवर - 1:
रांची के प्राचीन दुर्गाबाड़ी मंदिर में विजयादशमी के दिन माँ दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन से पूर्व महिलाएं माँ के चरणों में सिंदूरदान करती हैं। इसके पश्चात पारंपरिक गीतों और उल्लास के बीच एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर 'सिंदूर खेला' का यह अनूठा उत्सव मनाया जाता है। इस पारंपरिक अनुष्ठान में पिछले कई वर्षों से लगातार भाग ले रही महिला ने सिंदूर खेला के बारे में बताया।
बाइट (01): लाल साड़ी में महिला, दुर्गाबाड़ी, रांची
वॉयस OVER - 2: राजधानी रांची के इस प्रतिष्ठित दुर्गाबाड़ी में आयोजित होने वाले सिंदूर खेला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब इसमें केवल बंगाली समुदाय की महिलाएं ही नहीं, बल्कि विभिन्न अन्य समाजों और समुदायों की महिलाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। यह सांप्रदायिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता इस आयोजन को और भी अधिक आकर्षक बना देती है।
बाइट (02): बालिका , रांची
वॉयस ओवर अंतिम: राजधानी रांची के दुर्गाबाड़ी मंदिर में चली आ रही सिंदूर खेला की यह परंपरा पूरे 140 वर्ष पुरानी है। आज भी बंगाली समाज और शहर की महिलाओं द्वारा इस समृद्ध परंपरा का पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निर्वहन किया जा रहा है।
रांची से प्रताप की रिपोर्ट।