व्यापार

RAS कैडर के 9 में से 7 पद खाली:आबकारी में 11 साल में राजस्व लक्ष्य ढाई गुना, अब कोई RAS आना ही नहीं चाहता

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 13 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
RAS कैडर के 9 में से 7 पद खाली:आबकारी में 11 साल में राजस्व लक्ष्य ढाई गुना, अब कोई RAS आना ही नहीं चाहता

प्रदेश में आबकारी विभाग का राजस्व लक्ष्य 11 साल में ढाई गुना के करीब पहुंच गया है। वर्ष 2015-16 में 6712 करोड़ रुपए का लक्ष्य था, जो 2026-27 में बढ़कर 17 हजार करोड़ रुपए हो गया है। यानी इस अवधि में लक्ष्य 10,288 करोड़ रुपए बढ़ा है। लक्ष्य में लगातार बढ़ोतरी से राजस्व वसूली का दबाव भी बढ़ा है।

हालात यह हैं कि आरएएस अधिकारी अब आबकारी विभाग में पोस्टिंग लेने से परहेज करने लगे हैं। जिला आबकारी अधिकारी (डीईओ) के आरएएस कैडर के 9 निर्धारित पदों में से 7 खाली हैं। उदयपुर-जोधपुर जैसे संभाग मुख्यालयों पर भी आरएएस अधिकारी तैनात नहीं हैं। कहीं अतिरिक्त आबकारी आयुक्तों को चार्ज सौंपकर तो कहीं आबकारी सेवा के अधिकारियों के भरोसे काम चलाया जा रहा है।

विभाग में अफसरों की कमी या तैनाती का पेच?

प्रदेश में बीकानेर और भरतपुर को छोड़कर अन्य संभाग मुख्यालयों पर जिला आबकारी अधिकारी का चार्ज आरएएस अधिकारियों को दिया जाता है। इसके अलावा श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, झालावाड़ और अलवर में भी आरएएस कैडर के पद निर्धारित हैं, लेकिन यहां भी आरएएस की तैनाती नहीं है। विभागीय अधिकारियों ने इस मामले में स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी।

वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि नियुक्ति और तबादलों का जिम्मा कार्मिक विभाग के पास है। पहले पोस्टिंग की होड़, अब लक्ष्य चूकने के डर से बनाई दूरी आबकारी विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पहले विभाग में पोस्टिंग के लिए होड़ रहती थी, लेकिन अब राजस्व लक्ष्य पूरा करने का दबाव बढ़ गया है।

आरएएस अधिकारी प्रशासनिक सेवा से आते हैं, जबकि आबकारी विभाग में राजस्व वसूली और शराब ठेकों की गारंटी पूरी करवाना प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। लक्ष्य हासिल करने में पिछड़ने की आशंका अधिकारियों को इस विभाग से दूरी बनाने के लिए मजबूर कर रही है। इसके उलट, आबकारी सेवा के अधिकारियों को शुरुआत से ही राजस्व संबंधी कामकाज का अनुभव मिलता है।

आबकारी निरीक्षक से पदोन्नत होकर डीईओ बनने वाले अधिकारी विभागीय प्रक्रिया और राजस्व लक्ष्य की व्यवस्था से परिचित होते हैं। संभाग मुख्यालयों पर दोहरी जिम्मेदारी, अतिरिक्त आयुक्त पर डीईओ का भार उदयपुर और जोधपुर में जिला आबकारी अधिकारी के पद खाली होने से अतिरिक्त आबकारी आयुक्त जोन को ही इनका अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।

इससे संभागीय जिम्मेदारियों के साथ जिला स्तर का काम भी संभालना पड़ रहा है। दूसरी ओर, जयपुर और बीकानेर में अतिरिक्त आयुक्त के पद खाली हैं। पंजाब बॉर्डर के श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिलों में यही हाल, तस्करी बड़ी चुनौती पंजाब बॉर्डर से सटे श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में में भी आरएएस अधिकारियों के पद खाली हैं।

इन जिलों में शराब तस्करी पर नियंत्रण, ठेकों की गारंटी पूरी करवाने और लक्ष्य हासिल करने की चुनौतियां ज्यादा हैं। ऐसे में यहां भी आबकारी सेवा के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ठेका यूनियन बोली- आबकारी सेवा के अधिकारियों को पद दें शराब ठेकेदार यूनियन राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष पंकज धनखड़ का कहना है कि जिला आबकारी अधिकारी के पदों पर आबकारी सेवा के अधिकारियों को नियुक्त किया जाना चाहिए।

आरएएस को आबकारी नीति और विभागीय कामकाज समझने में समय लगता है। व्यवस्था की समझ विकसित होने तक उनका तबादला हो जाता है, जिससे ठेकेदारों की समस्याओं और मांगों का समय पर निस्तारण नहीं हो पाता। निचले स्तर के अधिकारी समस्याएं भेजते हैं, लेकिन उनका उचित समाधान नहीं हो पाता। लॉटरी की जगह बिडिंग सिस्टम लागू हुआ, विभाग पर 2 हजार करोड़ से ज्यादा बकाया लिकर यूनियन के पंकज धनकड़ के अनुसार, वर्ष 2020-21 से शराब ठेकों की गारंटी टूटने लगी और ठेकेदारों पर विभाग की करीब 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की बकाया राशि हो गई।

पहले लॉटरी सिस्टम में गारंटी नहीं बढ़ती थी, लेकिन बिडिंग सिस्टम में शराब की बिक्री का लक्ष्य बढ़ गया।

📡 स्रोत: NewsData.io

📰 पूरी खबर पढ़ें (NewsData.io पर जाएं)
J
JKS News Desk

जनता का संदेश की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।