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रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से:नाना पाटेकर के एक फोन कॉल ने दूर कर दिया था डर, साथ काम करने की जगाई थी उम्मीद

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से:नाना पाटेकर के एक फोन कॉल ने दूर कर दिया था डर, साथ काम करने की जगाई थी उम्मीद

पिछले दिनों नाना पाटेकर जी के देहावसान की खबर ने फिल्म प्रेमियों और उनके चाहने वालों को बुरी तरह झकझोर दिया। वे जितने प्रतिभाशाली अभिनेता थे, उतना ही बड़ा उनका दिल था। गरीबों, दुखियारों और किसानों के लिए उनके मन में बहुत कुछ करने का जज्बा था। मैंने भोपाल में पहली बार उनकी फिल्म ‘आज की आवाज’ देखी थी। याद है, फिल्म खत्म होने के बाद हर कोई नाना जी की ही बात कर रहा था। लोग हैरान थे कि यह कौन-सा एक्टर है। इतना दुबला-पतला इंसान और अपनी एक्टिंग से सबको हैरान कर दिया!

इसके बाद मैंने सिर्फ उनकी वजह से ‘अंकुश’ देखी और वहीं से उनका फैन हो गया। हमारी इंडस्ट्री में एक से बढ़कर एक अच्छे अभिनेता आए हैं, मगर नाना जी सबसे अलग थे। उनकी एक्टिंग का अंदाज, डायलॉग बोलने का तरीका और बॉडी लैंग्वेज, सब कुछ कमाल का था। नाना जी चैरिटी में दिल खोलकर पैसे देते थे। सूखा पड़ता तो किसानों की मदद के लिए आगे आते, बाढ़ आती तो प्रभावित लोगों की सहायता करते और किसी किसान के खुदकुशी कर लेने पर उसके परिवार की मदद करते।

दूसरों की तकलीफ को वे बहुत शिद्दत से महसूस करते थे। इसी बात पर मुझे निदा फ़ाज़ली एक शेर याद आ रहा है : घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए मेरी उनसे पहली मुलाकात सुधाकर बोकाडे जी ने करवाई थी। उस समय वे नाना जी को डायरेक्टर के तौर पर लेकर फिल्म ‘प्रहार’ बना रहे थे।

मैं बोकाडे जी की फिल्म ‘कन्यादान’ लिख रहा था। इसके बाद ऋषि कपूर जी ने फिल्म ‘हम दोनों’ की शूटिंग के दौरान उनसे मेरी दूसरी मुलाकात करवाई। उनसे मेरी कई बार मुलाकात हुई, लेकिन कभी ऐसा दोस्ताना रिश्ता नहीं बन पाया कि हम लंबे समय तक साथ बैठकर बातें करते या गप्पें मारते। मेरा एक दोस्त है समीर कार्निक।

वह सिर्फ दोस्त नहीं, मेरा छोटा भाई जैसा है। समीर ने हाल ही में एक फिल्म बनाई है, जिसमें नाना जी ने काम किया है। समीर जब कोई कहानी बनाता है तो मुझे सुनाता है और मैं जब कोई स्क्रिप्ट लिखता हूं तो उसे सुनाता हूं। इसी सिलसिले में मैंने अपनी एक स्क्रिप्ट समीर को दी। उसे वह बहुत पसंद आई और उसने वह नाना पाटेकर जी को सुनाई।

उन्हें भी पसंद आ गई। नाना जी ने समीर से कहा, ‘रूमी को बोलो, मुझसे मिले। ’ इस पर समीर ने बड़े एक्साइटेड होकर मुझे फोन किया। बोला, ‘रूमी भाई, मैंने आपका बहुत बड़ा काम कर दिया। मैंने आपकी स्क्रिप्ट नाना जी को दी थी। उन्हें वह पसंद आ गई है और वे उसमें काम करने के लिए तैयार हैं। ’ यह सुनकर शुरू में तो मैं बहुत खुश हुआ।

नाना पाटेकर जैसा बड़ा एक्टर अगर आपकी स्क्रिप्ट पर काम करने के लिए हां कर दे, तो इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। लेकिन थोड़ी देर बाद जब मैंने इस बारे में सोचा, तो समीर से कहा, ‘यार समीर, मुझे उनसे डर लगता है। ’ समीर हंसने लगा। बोला, ‘किस बात का डर?’ मैंने कहा, ‘वे सेट पर गुस्सा करते हैं, चिल्लाते हैं, डायरेक्टर को डांट देते हैं।

और तुम्हें तो मालूम ही है कि मेरा मिजाज बहुत सॉफ्ट है। अगर उन्होंने मुझे सेट पर कुछ कह दिया तो मेरा तो माइंड स्विच ऑफ हो जाएगा। मैं शूटिंग ही नहीं कर पाऊंगा। ’ समीर बोला, ‘ऐसा कुछ नहीं है। मैंने भी तो अभी उनके साथ फिल्म बनाई है। जुबान से भले ही वे कड़े हों, लेकिन दिल के बहुत अच्छे हैं।

’ अब हुआ यूं कि समीर ने यह बात नाना जी को भी बता दी। अगले ही दिन मेरे फोन की घंटी बजी। मैं ख्वाब में भी नहीं सोच सकता था कि नाना जी खुद मुझे फोन करेंगे। नंबर अनजान था, फिर भी मैंने फोन उठा लिया। दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘रूमी?’ मैंने कहा, ‘जी?’ वे बोले, ‘नाना बोल रहा हूं, नाना पाटेकर। ’ मैं जहां बैठा था, वहीं से तुरंत खड़ा हो गया।

मैं इतना घबरा गया कि ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था। मैंने किसी तरह कहा, ‘जी नाना जी, नमस्ते। ’ वे बोले, ‘समीर बोल रहा था कि तू मुझसे डरता है?’ फिर बोले, ‘देख, मुझे कोई पागल कुत्ते ने नहीं काटा है कि मैं किसी को भी डांटता फिरूं। मैं थोड़ा कड़ा बोलता हूं, लेकिन किसी को हर्ट करने के लिए नहीं।

मैं फिल्म की अच्छाई के लिए बोलूंगा, फिल्म डिस्कस करूंगा, तेरी स्क्रिप्ट पर बात करूंगा। तू यह मत समझ कि मैं तुझे नहीं जानता। मेरी याददाश्त अच्छी है। तू अन्नू कपूर के साथ थिएटर करता था। तेरा थिएटर का बैकग्राउंड भोपाल से है। ’ फिर वे आगे बोले, ‘तेरे फादर को साहित्य अकादमी अवॉर्ड मिला है ना?’ मैंने कहा, ‘जी।

’ मैंने हैरानी से पूछा ‘आपको तो सब बातें मालूम हैं!’ वे बोले, ‘मैं जिसके साथ काम करता हूं, उसकी पूरी इन्क्वायरी करता हूं। ऋषि कपूर तेरी बहुत तारीफ करता था। तू बेफिक्र रह। मैं तुझे नहीं डांटूंगा। तू जैसा बोलेगा, अपन वैसे काम करेंगे। ’ यह सुनकर मैं बहुत इमोशनल हो गया। वे बोले, ‘मैंने स्क्रिप्ट में कुछ पॉइंट्स निकाले हैं।

तू समीर के साथ पुणे आ जा। खड़कवासला में बैठकर हम स्क्रिप्ट डिस्कस करेंगे और फिर यह पिक्चर करेंगे। ’ मैंने उन्हें शुक्रिया कहा और फोन रख दिया। मैं इतना उत्साहित था कि तुरंत समीर को फोन किया और उसे सारी बात बताई। लेकिन इत्तेफाक ऐसा रहा कि कभी नाना साहब व्यस्त हो जाते, कभी मैं और कभी समीर।

इसी तरह वक्त निकलता गया और हम खड़कवासला नहीं जा पाए। इस तरह, नाना जी के साथ काम करने की मेरी ख्वाहिश भी अब अधूरी रह गई। यह दुख मेरे साथ जिंदगी भर रहेगा। आज नाना जी को याद करते हुए उनकी फिल्म ‘आंच’ का उन्हीं का गाया यह गाना सुनिए, अपना ख्याल रखिए और खुश रहिए : सुन मोरी रानी तोहरी जवानी, बाकी दुनिया पानी-पानी…

📡 स्रोत: NewsData.io

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