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रासायनिक कीटनाशकों की तुलना में नीम तेल का कोशिकाओं पर कम प्रभाव, एसपीयू के शोध में सामने आया अंतर

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
रासायनिक कीटनाशकों की तुलना में नीम तेल का कोशिकाओं पर कम प्रभाव, एसपीयू के शोध में सामने आया अंतर

मंडी: फसलों को कीटों से बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले रासायनिक कीटनाशकों और नीम तेल आधारित कीटनाशकों के प्रभाव को लेकर सरदार पटेल यूनिवर्सिटी मंडी के विद्यार्थियों ने शोध किया है। अध्ययन में प्याज की जड़ की सक्रिय कोशिकाओं को मॉडल के रूप में इस्तेमाल किया गया। शोध के दौरान क्लोरपाइरीफॉस और डाइथेन एम-45 का कोशिका विभाजन पर अधिक प्रभाव पाया गया, जबकि नीम तेल आधारित कीटनाशक का प्रभाव तुलनात्मक रूप से कम रहा।

यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है। सरदार पटेल यूनिवर्सिटी मंडी के जूलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीलम ठाकुर के नेतृत्व में एमएससी विद्यार्थियों सुजाता धीमान, कनिका, रुचि, कुसुमा, अर्शिया सूद, गगनदीप सिंह और दिपांश कटोच ने यह अध्ययन किया। शोध में फसलों में इस्तेमाल होने वाले क्लोरपाइरीफॉस और डाइथेन एम-45 की तुलना नीम तेल आधारित कीटनाशकों से की गई।

अध्ययन के लिए प्याज की जड़ की सक्रिय कोशिकाओं को मॉडल के रूप में इस्तेमाल किया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार क्लोरपाइरीफॉस और डाइथेन एम-45 ने कोशिका विभाजन को अधिक प्रभावित किया और इनके संपर्क में कोशिकीय तथा गुणसूत्रीय क्षति के संकेत अधिक पाए गए। वहीं, नीम तेल आधारित कीटनाशक का प्रभाव तुलनात्मक रूप से कम रहा।

शोधकर्ताओं के अनुसार इन रसायनों और नीम तेल के बीच इस तरह का तुलनात्मक अध्ययन पहले प्रकाशित नहीं हुआ था। यूनिवर्सिटी की ओर से किए गए इस शोध को स्कोपस-इंडेक्स्ड स्प्रिंगर नेचर के Journal of Crop Health में प्रकाशित किया गया है। एमएससी विद्यार्थियों के लिए अपने शोध का अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित होना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

शोधार्थी सुजाता धीमान और कनिका ने बताया कि शोध कार्य के दौरान उन्हें डॉ. नीलम ठाकुर और विश्वविद्यालय प्रबंधन का सहयोग मिला। करीब छह महीने में पूरा किया गया यह अध्ययन अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हुआ है। शोध के निष्कर्ष नीम तेल को वनस्पति-आधारित संभावित विकल्प के तौर पर आगे अध्ययन करने का आधार देते हैं।

हालांकि शोधकर्ताओं के अनुसार खेत स्तर पर इसके प्रभाव, अन्य जैव-कीटनाशकों के साथ तुलना और लागत-लाभ का आकलन अभी किया जाना बाकी है। ऐसे में अध्ययन के नतीजों को नीम तेल आधारित कीटनाशकों को पूरी तरह सुरक्षित या पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर साबित करने के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

बाइट — डॉ. नीलम ठाकुर, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसपीयू, जूलॉजी

बाइट — सुजाता धीमान, शोधार्थी बाइट — कनिका, शोधार्थी

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।