रायपुर में कोयला मंत्रालय का स्टार रेटिंग पुरस्कार समारोह, देश की 50 पांच सितारा खदानें सम्मानित
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रायपुर। भारत सरकार के कोयला मंत्रालय की ओर से रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिसॉर्ट में स्टार रेटिंग पुरस्कार समारोह-2026 का आयोजन किया गया। समारोह में वित्त वर्ष 2024-25 के मूल्यांकन के आधार पर कोयला एवं लिग्नाइट खनन के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली देश की 50 पांच सितारा खदानों को सम्मानित किया गया। इनमें 15 भूमिगत और 35 ओपनकास्ट खदानें शामिल हैं।
समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने कोयला क्षेत्र में उत्कृष्टता, सुरक्षित खनन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने खनन गतिविधियों में जिम्मेदार और पर्यावरण अनुकूल पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता भी बताई।
कार्यक्रम में कोयला मंत्रालय के अपर सचिव सनोज कुमार झा, कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष बी. साईराम, कोयला नियंत्रक संगठन (CCO), नई दिल्ली के कोयला नियंत्रक सतीश कुमार सहित मंत्रालय और विभिन्न कोयला कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इस समारोह में छत्तीसगढ़ की खदानों ने भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। पांच सितारा रेटिंग प्राप्त खदानों में दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की तीन भूमिगत खदानें—बंगवार अंडरग्राउंड माइन, खैराहा अंडरग्राउंड माइन और बहेराबांध अंडरग्राउंड माइन शामिल हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड की गेरे पेलमा सेक्टर-III कोल माइन और पारसा केंटे कोलियरीज लिमिटेड की पारसा ईस्ट एंड कांटा बासन ओपनकास्ट कोल माइन को भी पांच सितारा रेटिंग मिली है।
गौरतलब है कि कोयला मंत्रालय की स्टार रेटिंग नीति के तहत कोयला और लिग्नाइट खदानों के प्रदर्शन का विभिन्न मानकों पर मूल्यांकन किया जाता है। इनमें परिचालन दक्षता, उत्पादन एवं उत्पादकता, तकनीकी नवाचार, व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, पर्यावरण प्रबंधन, सतत विकास और स्थानीय समुदायों के कल्याण जैसे पहलू शामिल हैं। इस मूल्यांकन और सत्यापन की प्रक्रिया कोयला नियंत्रक संगठन द्वारा नियुक्त समीक्षकों के माध्यम से पूरी की जाती है।
स्टार रेटिंग प्रणाली का उद्देश्य खदानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और सुरक्षित, वैज्ञानिक तथा पर्यावरण अनुकूल खनन की बेहतर कार्यप्रणालियों को प्रोत्साहित करना है। इसके माध्यम से कोयला क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रदर्शन आधारित कार्यसंस्कृति को भी मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।