रीवा के प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में उतरे उमंग सिंघार, बोले—विधानसभा में प्रमुखता से उठाएंगे ग्रामीणों की आवाज
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
सरई-रोझौही पहुंचकर जल सत्याग्रह कर रहे आदिवासियों से मिले नेता प्रतिपक्ष, स्व. विमला कोल को दी श्रद्धांजलि; पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये की सहायता
कहा—विकास के नाम पर ग्रामीणों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए
रीवा, 25 अक्टूबर 2026। रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर विरोध तेज हो गया है। सरई कला और रोझौही गांवों के ग्रामीणों तथा आदिवासी समुदाय की चिंताओं के बीच मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार रविवार को सरई-रोझौही पहुंचे। उन्होंने जल सत्याग्रह कर रहे आंदोलनकारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनकी मांगों को विधानसभा में प्रमुखता से उठाने का भरोसा दिलाया।
इस दौरान उमंग सिंघार ने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाली विमला कोल को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके शोकाकुल परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की।
सिंघार ने कहा कि परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह प्रस्तावित परियोजना का विरोध करेंगे और इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाएंगे। उनके अनुसार, परियोजना से जुड़े निर्णयों में स्थानीय लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और अधिकारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
विमला कोल की मौत की रिपोर्ट पर अधिकारियों से मांगा जवाब
स्व. विमला कोल के परिवार से मुलाकात के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने प्रशासनिक अधिकारियों से उनकी मृत्यु से संबंधित रिपोर्ट के बारे में सवाल किए। उन्होंने तहसीलदार और नायब तहसीलदार से पूछा कि रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं भेजी गई। इस पर तहसीलदार ने मौखिक रिपोर्ट भेजे जाने की बात कही। चर्चा के दौरान सिंघार ने मामले में स्पष्टता और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विमला कोल की मृत्यु के कारणों और उससे जुड़े घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि जांच एवं संबंधित अभिलेखों के आधार पर होना आवश्यक है। घटना के बाद क्षेत्र में परियोजना को लेकर ग्रामीणों की आशंकाएं और आंदोलन से जुड़े सवाल और गंभीर हो गए हैं।
‘विकास के नाम पर विनाश स्वीकार नहीं’
मीडिया से चर्चा करते हुए उमंग सिंघार ने प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के संबंध में स्थानीय आबादी की सुरक्षा, पर्यावरण और संभावित स्वास्थ्य प्रभावों से जुड़ी चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका विरोध विकास से नहीं, बल्कि ऐसे विकास से है जिसमें प्रभावित परिवारों की आशंकाओं और अधिकारों को पर्याप्त महत्व न दिया जाए।
सिंघार ने कहा कि आदिवासी समुदाय के जल, जंगल, जमीन और अस्तित्व से जुड़े मुद्दों की अनदेखी नहीं की जा सकती। परियोजना को लेकर ग्रामीणों की आपत्तियों पर पारदर्शी तरीके से विचार होना चाहिए और उन्हें तथ्यों के आधार पर संतोषजनक जवाब दिया जाना चाहिए।
सरई कला और रोझौही के ग्रामीण जता रहे हैं आपत्तियां
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र में टाटा पावर की प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर परियोजना को लेकर सरई कला और रोझौही गांवों के ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। आंदोलनकारी परियोजना के संभावित प्रभावों और अपने अधिकारों को लेकर चिंताएं जता रहे हैं तथा जल सत्याग्रह के माध्यम से विरोध दर्ज करा रहे हैं।
आंदोलन के दौरान विमला कोल की तबीयत बिगड़ने के बाद उनकी मृत्यु हुई थी। हालांकि, उनकी मृत्यु और परियोजना के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इस पहलू पर निष्कर्ष संबंधित जांच और चिकित्सकीय तथ्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
क्षेत्र के दौरे के दौरान उमंग सिंघार ने प्रभावित ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों और समस्याओं को विधानसभा में उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े निर्णयों में स्थानीय समुदाय की चिंताओं, अधिकारों और सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाना चाहिए तथा प्रशासन को उठाए जा रहे सवालों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।