रोहतक में बाबा मस्तनाथ समाधि स्थल पर परिवार सहित पहुंचे भागवत सिंह तोमर
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर गुरु के दर्शन कर लिया आशीर्वाद, वर्षों पुरानी परंपरा और धार्मिक स्थल की व्यवस्थाओं को बताया विशेष
हरदा। मध्यप्रदेश के हरदा जिले के ग्राम गहाल, गोरज धाम निवासी भागवत सिंह तोमर ने भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर परिवार सहित हरियाणा के रोहतक स्थित प्रसिद्ध बाबा मस्तनाथ समाधि स्थल पहुंचकर दर्शन किए। उन्होंने समाधि स्थल पर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
भागवत सिंह तोमर ने बताया कि बाबा मस्तनाथ समाधि स्थल की यात्रा का उन्हें पूर्व में भी सौभाग्य प्राप्त हुआ है। यहां वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत प्रत्येक वर्ष 23, 24 और 25 फरवरी को विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर बाबा मस्तनाथ के दर्शन करते हैं। उन्होंने भी पूर्व में मेले के दौरान समाधि स्थल पहुंचकर दर्शन किए थे।
भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर इस बार भागवत सिंह तोमर अपनी पत्नी शोभा तोमर, पुत्र योगेश सिंह तोमर, पुत्रवधू ज्योति तोमर और पोते एकाक्ष सिंह तोमर सहित परिवार के अन्य सदस्यों के साथ समाधि स्थल पहुंचे। परिवार ने विधिवत दर्शन-पूजन कर गुरु का आशीर्वाद लिया।
उन्होंने बताया कि बाबा मस्तनाथ समाधि स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां स्कूल, कॉलेज और अस्पताल का संचालन किया जाता है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं।
इस अवसर पर उन्होंने यहां के महंत बाबा बालकनाथ के भी दर्शन किए। भागवत सिंह तोमर ने कहा कि बाबा मस्तनाथ की तपोभूमि में दर्शन करना उनके लिए श्रद्धा और सौभाग्य का विषय है। परिवार सहित यहां पहुंचकर आध्यात्मिक शांति और गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर उनके लिए विशेष अनुभव रहा।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
बाबा मस्तनाथ समाधि स्थल पर भागवत सिंह तोमर का दर्शन एक धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, जहाँ श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर गुरु से आशीर्वाद लेते हैं। यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्रीय धार्मिक उत्सवों और सांस्कृतिक विरासत को उजागर करती है, तथा स्थानीय और बाहरी भक्तों को एकजुट करती है। ऐसे कार्यक्रमों से जनता में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है, पर्यटन में वृद्धि होती है और सामाजिक एकता एवं सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने में मदद मिलती है।