रोंगटे खड़े कर देगी सीरियल किलर की ये इनवेस्टिगेशन, IMDb पर 8.5+ रेटिंग वाले 4 क्राइम शोज
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
अगर आपको क्राइम, मर्डर मिस्ट्री और सीरियल किलर की इनवेस्टिगेशन वाली कहानियां पसंद हैं, तो ओटीटी पर कई ऐसी शानदार सीरीज मौजूद हैं, जो शुरुआत से ही आपको स्क्रीन से बांधकर रखती हैं.
इनमें पुलिस इनवेस्टिगेशन के साथ-साथ अपराधियों की मानसिकता और उनके अपराध करने के तरीकों को भी करीब से दिखाया गया है.
आइए नजर डालते हैं ऐसी ही 4 चर्चित क्राइम सीरीज पर, जिन्हें आप ओटीटी पर देख सकते हैं.
'माइंडहंटर' 'माइंडहंटर' एक अमेरिकी साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर सीरीज है, जो सीरियल किलर्स की मानसिकता और उनके अपराध करने के तरीके को समझने की कोशिश करती है.
इसकी कहानी 1970 के दशक के आखिर की है, जहां FBI एजेंट्स होल्डन फोर्ड और बिल टेंच कुख्यात अपराधियों से बातचीत कर उनकी सोच और व्यवहार को समझने की कोशिश करते हैं.
सीरीज में कई खतरनाक सीरियल किलर्स के इंटरव्यू और उनसे जुड़ी इनवेस्टिगेशन को दिखाया गया है. 'माइंडहंटर' को आप नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं. इस सीरीज को IMDb पर 8.6 की रेटिंग मिली है.
ये भी पढ़ें:- PM Modi Birthday Live: अक्षय कुमार से कंगना रनौत तक, बॉलीवुड सेलेब्स ने पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दी
'ट्रू डिटेक्टिव' 'ट्रू डिटेक्टिव' का पहला सीजन एक रहस्यमयी और डार्क मर्डर केस की कहानी है.
इसमें मैथ्यू मैककोनहे और वुडी हैरेलसन ने डिटेक्टिव रस्ट कोल और मार्टिन हार्ट का किरदार निभाया है. दोनों 1995 में हुए एक सीरियल किलर केस की जांच करते हैं.
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, केस की कई चौंकाने वाली परतें सामने आती हैं और कहानी और भी दिलचस्प होती जाती है. IMDb पर इस सीजन की रेटिंग 8.8 है.
पहला सीजन 8 एपिसोड का है और भारत में इसे जियो हॉटस्टार पर देखा जा सकता है.
<p style="text-ali
📡 स्रोत: ABP Live Film
💡 पृष्ठभूमि (Background)
इस खबर में क्राइम शोज की बात की गई है जो सीरियल किलर की इनवेस्टिगेशन पर आधारित हैं। 8.5+ IMDb रेटिंग वाले चार शो का चयन कर उनके रोचक पहलुओं को उजागर किया गया है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज के दर्शक जासूसी और मनोवैज्ञानिक थ्रिलर से बेहद प्रभावित होते हैं। ऐसे शोज से पुलिस कामकाज और अपराधी मनोविज्ञान की गहराई से झलक मिलती है, जिससे दर्शकों की जागरूकता बढ़ती है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि लोग अपराधों के प्रति अधिक सतर्क हों और साक्ष्य आधारित सोच विकसित करें।