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रूस के साथ अकादमिक और सांस्कृतिक रिश्ते मजबूत करेगा सीयूएचपी रूसी भाषा एवं संस्कृति केंद्र

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
रूस के साथ अकादमिक और सांस्कृतिक रिश्ते मजबूत करेगा सीयूएचपी रूसी भाषा एवं संस्कृति केंद्र

कुलपति प्रो. एस.पी. बंसल के रूसी विश्वविद्यालयों के संभावित दौरे से सहयोग को मिल सकती है नई दिशा

सितंबर 19, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश): केंद्रीय हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (सीयूएचपी) भारत और रूस के बीच शैक्षणिक, शोध, सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करने जा रहा है। विश्वविद्यालय रूसी विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के साथ व्यापक सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है, जिसमें संयुक्त शोध, रूसी भाषा एवं संस्कृति, छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान, अल्पकालिक शैक्षणिक कार्यक्रम, पर्यटन संवर्धन और आपदा प्रबंधन प्रमुख क्षेत्र होंगे।

इसी दिशा में सीयूएचपी में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.पी. बंसल, भारत में रॉस्ट्रूडनिचेस्टवो के रूसी प्रतिनिधि कार्यालय की प्रमुख डॉ. एलेना रेमिज़ोवा तथा संगठन की युवा मामलों की मुख्य समन्वयक अनास्तासिया इल्यूशिना ने भाग लिया। बैठक में कुलपति के सचिव प्रो.

सुमन शर्मा, प्रो. इंदर ठाकुर तथा राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला से डॉ. अमित कटोच भी उपस्थित रहे। बैठक में भारत और रूस के बीच उच्च शिक्षा एवं सांस्कृतिक संपर्क को व्यापक बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। रूसी भाषा एवं संस्कृति केंद्र स्थापित करने की तैयारी बैठक में सीयूएचपी में रूसी भाषा एवं संस्कृति केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव विशेष रूप से चर्चा में रहा।

प्रस्तावित केंद्र को रूसी दूतावास/रॉस्ट्रूडनिचेस्टवो तथा रूस के विश्वविद्यालयों के सहयोग से विकसित किए जाने की संभावना है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को रूसी भाषा सीखने के साथ-साथ रूस के साहित्य, इतिहास, कला, संस्कृति और सामाजिक परंपराओं से परिचित कराना होगा। केंद्र के माध्यम से रूसी भाषा के पाठ्यक्रमों के अलावा व्याख्यान, कार्यशालाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भाषा प्रशिक्षण, शैक्षणिक संवाद तथा भारत-रूस युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।

इससे सीयूएचपी के विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय भाषा एवं सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त करने के नए अवसर मिलेंगे। विश्वविद्यालय पहले से ही चीनी और तिब्बती अध्ययन जैसे क्षेत्रों में अकादमिक गतिविधियां संचालित कर रहा है और अब विदेशी भाषाओं तथा अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के दायरे को और व्यापक बनाने पर जोर दे रहा है।

संयुक्त शोध और अल्पकालिक कार्यक्रमों पर जोर प्रस्तावित भारत-रूस सहयोग में संयुक्त शोध को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। सीयूएचपी रूस के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) करने की संभावनाएं तलाश रहा है। इन समझौतों के माध्यम से संयुक्त शोध परियोजनाएं, अकादमिक प्रकाशन, सम्मेलन, सेमिनार और अंतरविषयक अध्ययन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

सहयोग के तहत अल्पकालिक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, समर एवं विंटर स्कूल, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और छात्र-शिक्षक विनिमय शुरू करने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक विज्ञान, भाषा, संस्कृति, पर्यटन और आपदा प्रबंधन जैसे विषय संभावित सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हो सकते हैं।

रूस से हिमाचल के पर्यटन को जोड़ने की पहल भारत-रूस सहयोग में पर्यटन संवर्धन को भी अहम क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। हिमाचल प्रदेश अपनी हिमालयी भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध पर्यटन स्थलों के कारण अंतरराष्ट्रीय पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

सीयूएचपी के माध्यम से रूस के साथ पर्वतीय पर्यटन, सतत पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, पर्यटन प्रबंधन और डेस्टिनेशन मैनेजमेंट के क्षेत्र में शैक्षणिक सहयोग की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं। संयुक्त अध्ययन और अल्पकालिक कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यटन के अंतरराष्ट्रीय मॉडल को समझने का अवसर मिलेगा।

सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से रूसी विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पर्यटकों के बीच हिमाचल की संस्कृति, परंपराओं और पर्यटन स्थलों को लेकर जागरूकता बढ़ाने के अवसर भी विकसित हो सकते हैं। इसी तरह भारतीय विद्यार्थियों को रूस की पर्यटन व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिलेगा।

प्रस्तावित सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में कुलपति प्रो. एस.पी. बंसल के आगामी समय में रूस के कुछ विश्वविद्यालयों का दौरा करने की संभावना है। संभावित दौरे के दौरान रूसी विश्वविद्यालयों के साथ प्रत्यक्ष संवाद कर संयुक्त शोध, भाषा एवं संस्कृति केंद्र, छात्र आदान-प्रदान, अल्पकालिक पाठ्यक्रम और पर्यटन शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की जा सकती है।

प्रो. बंसल ने सीयूएचपी को एक वैश्विक शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित करने और विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। उन्होंने विश्वविद्यालय में विदेशी भाषाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को विस्तार देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसरो परियोजना से शोध को मिलेगा नया आयाम कुलपति ने विश्वविद्यालय में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सहयोग से प्रस्तावित बहु-करोड़ टेलीस्कोप परियोजना का भी उल्लेख किया।

यह परियोजना विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक शोध बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए नई शोध संभावनाएं खोल सकती है तथा भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा दे सकती है। प्रस्तावित भारत- रूस सहयोग सीयूएचपी के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में एक व्यापक पहल के रूप में सामने आया है, जिसके केंद्र में शिक्षा, शोध, रूसी भाषा, संस्कृति, पर्यटन, युवा आदान-प्रदान और वैश्विक अकादमिक सहयोग होंगे।

इसके माध्यम से सीयूएचपी हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थियों को वैश्विक शैक्षणिक अवसरों से जोड़ने के साथ भारत और रूस के बीच लोगों के बीच संपर्क को भी मजबूत करने की दिशा में भूमिका निभा सकता है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।