सागर के जालंधर गांव में विराजमान हैं मां ज्वाला माई, सात ज्वालाओं पर पद्मासन में विराजी अनोखी प्रतिमा
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विंध्याचल की पहाड़ियों और जंगलों के बीच स्थित प्राचीन मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु, दोनों नवरात्रि में लगता है मेला
सागर, अक्टूबर 12: जिले के जालंधर गांव में विंध्याचल की पहाड़ियों की गोद में मां ज्वाला माई का अनोखा मंदिर स्थित है। सागर-खुरई राष्ट्रीय राजमार्ग पर जरुआखेड़ा से करीब 10 किलोमीटर दूर जंगल के बीच बने इस मंदिर में दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मंदिर में स्थापित मां ज्वाला माई की करीब चार फुट ऊंची प्रतिमा एक ही पत्थर से निर्मित है। माता सात ज्वालाओं के ऊपर पद्मासन मुद्रा में विराजमान हैं। प्रतिमा की विशेषता यह है कि माता की जीभ पेट तक दिखाई देती है और पेट पर भी एक मुख बना हुआ है।
जानकारों के अनुसार, इस प्रतिमा को रक्तबीज दैत्य के संहार से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के साथ देखा जाता है। मंदिर परिसर में मां गौरी और भगवान गणेश की प्राचीन प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
मंदिर में चैत्र और शारदीय, दोनों नवरात्रियों के दौरान मेला लगता है। इस अवसर पर श्रद्धालु माता को चुनरी और ध्वजा अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं। पहाड़ियों और जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर अपनी अनोखी प्रतिमा और प्राचीन धार्मिक परंपराओं के लिए विशेष पहचान रखता है।
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बाइट--1-मदन सिंह राजपूत, व्यवस्थापक
बाइट-2 ऊधो दास, मंदिर के पुजारी
बाइट03-ः अतुल भारद्वाज, श्रद्धालु