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सागर में सांकेतिक भाषा दिवस पर जागरूकता कार्यशाला, समावेशी समाज का दिया संदेश

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 30 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
सागर में सांकेतिक भाषा दिवस पर जागरूकता कार्यशाला, समावेशी समाज का दिया संदेश

राज्य दिव्यांगजन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया ने समानुभूति

सम्मान और समान अवसर पर दिया जोर, 100 से अधिक शिक्षक-विद्यार्थियों ने लिया प्रशिक्षण

सागर, सितंबर 29: जिले के डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। विशेष आवश्यकता समूह शिक्षा विभाग, एनसीईआरटी और विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग के संयुक्त आयोजन में हुई कार्यशाला में भारतीय सांकेतिक भाषा को समावेशी समाज का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया।

मध्यप्रदेश के राज्य दिव्यांगजन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया ने कहा—“सवाल नज़र का नहीं, नज़रिए का है।” उन्होंने दिव्यांगजनों को सहानुभूति के बजाय समानुभूति, सम्मान और समान अवसर देने पर जोर दिया। कार्यशाला में दिव्यांगता से जुड़े विषयों पर प्रस्तुतियां दी गईं और भारतीय सांकेतिक भाषा का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

इसमें 100 से अधिक शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल हुए।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

सांकेतिक भाषा जागरूकता कार्यशाला, अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के उपलक्ष्य में सागर के डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में आयोजित की गई। यह कार्यक्रम विशेष आवश्यकता समूह शिक्षा विभाग, एनसीईआरटी और विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग के सहयोग से हुआ, जहाँ 100 से अधिक शिक्षक-विद्यार्थियों ने सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण लिया। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संवाद की बाधा को कम कर समावेशी समाज के निर्माण में सहायक है। आम जनता पर इसका असर यह है कि समाज में दिव्यांगों के

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।