5 साल में डिफेंस एक्सपोर्ट साढ़े 4 गुना हुआ:₹38 हजार करोड़ पार, इसमें प्राइवेट सेक्टर का हिस्सा 45%
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देश ने पिछले 5 साल में रक्षा उत्पादन में एक बड़ी क्रांति दर्ज की है। यह बदलाव सैन्य टेक्नोलॉजी निजी क्षेत्र के साथ साझा करने से हुआ है। सेना के लिए हथियार और साजो-सामान तैयार करने के मामले में अब सरकारी प्रतिष्ठानों के साथ निजी कंपनियों का बड़ा नेटवर्क खड़ा हो गया है। हथियार आयात करने के मामले में शीर्ष 5 देशों में गिने जाने वाले भारत ने इसके दम पर तस्वीर उलट दी है।
पहली बार सेनाओं के लिए हथियारों के आयात पर जितनी रकम खर्च हुई, उससे अधिक का रक्षा निर्यात देश ने किया। प्राइवेट कंपनियों का एक्सपोर्ट 17,353 करोड़ रुपए पहुंचा भास्कर ने उच्च स्तरीय और अत्याधुनिक सैन्य टेक्नोलॉजी निजी उद्योगों को देने और उससे हुए बदलाव की पड़ताल की। इसमें सामने आया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) से मिली टेक्नोलॉजी के बल पर निजी कंपनियों का रक्षा निर्यात 5 सालों में 7,271 करोड़ रु.
से बढ़कर 17,353 करोड़ रु.
हो गया। निजी सैन्य इंडस्ट्री ने निर्यात में 138.7% की बढ़ोतरी निजी सैन्य इंडस्ट्री ने निर्यात में 138.7% की बढ़ोतरी दर्ज की। संसद में पेश आंकड़े के अनुसार, 2025-26 में विदेशी पूंजीगत रक्षा खरीद पर 37,047.31 करोड़ रु.
खर्च हुए थे, जबकि इसी अवधि में भारत से सरकारी और निजी कंपनियों का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपए रहा, जिसमें निजी सैन्य इंडस्ट्री का योगदान 45.2% दर्ज हुआ। बड़ी वजह यह रही कि मिसाइलों से लेकर रडार, ड्रोन और कॉम्बैट उपकरणों तक निजी उद्योग को डीआरडीओ से 2,372 टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर हुआ।
आपूर्ति सरकारी कारखानों पर निर्भर नहीं रक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि किसी बड़े सैन्य संकट में हथियारों और उपकरणों की आपूर्ति के लिए देश को सरकारी कारखानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सूत्रों ने बताया कि रक्षा उत्पादन में एक और बाधा दूर करने की दिशा में बड़ा फैसला हुआ है, जिसके तहत उद्योगों के साथ टेक्नोलॉजी सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड साझा किया जा सकेगा।
आधुनिक रडार, ड्रोन, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों में उपकरण के साथ उसका सॉफ्टवेयर बेहद अहम है। रक्षा उत्पादन पांच साल में 3 लाख करोड़ होगा इस वित्त वर्ष में रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रु.
पहुंच चुका है। इसमें निजी क्षेत्र का योगदान करीब 24% हो गया। 5 साल में स्वदेशी रक्षा उत्पादन 3 लाख करोड़ रु.
तक पहुंचेगा। डी
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar