एक साल से रुकी थी पढ़ाई, पुलिस ने थामा हाथ तो फिर स्कूल पहुंची नीरू
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चित्तौड़गढ़ में कालिका पेट्रोलिंग यूनिट ने संवेदनशील पहल करते हुए आर्थिक परेशानियों के कारण करीब एक साल से पढ़ाई से दूर नीरू कीर की शिक्षा दोबारा शुरू करवाने में मदद की। दसवीं पास करने के बाद निजी विद्यालय की बकाया फीस के चलते नीरू को टीसी नहीं मिल पा रही थी। पुलिस टीम ने विद्यालय प्रबंधन और परिजनों से समन्वय कर फीस में रियायत दिलवाई, जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करवाए और राजकीय शहीद मेजर नटवर शक्तावत विद्यालय में कक्षा 11वीं के कृषि संकाय में उसका प्रवेश सुनिश्चित करवाया।
चित्तौड़गढ़, 23 अक्टूबर। चित्तौड़गढ़ में पुलिस की एक संवेदनशील पहल ने एक बेटी की पढ़ाई छूटने से बचा ली। मां का साया सिर पर नहीं, परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर और दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए जरूरी टीसी भी नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में नीरू कीर की पढ़ाई करीब एक साल तक अटकी रही। लेकिन कालिका पेट्रोलिंग यूनिट ने उसकी परेशानी को समझा और उसे दोबारा स्कूल पहुंचाने की जिम्मेदारी उठाई।
जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र यादव के निर्देशन में यह मामला जून माह में ग्रीष्मकालीन अभिरुचि एवं कौशल विकास प्रशिक्षण शिविर के दौरान सामने आया। गश्त के दौरान कालिका पेट्रोलिंग यूनिट की टीम बच्चों से संवाद कर रही थी। इसी दौरान नीरू ने अपनी परेशानी साझा की। दसवीं पास करने के बाद निजी विद्यालय की बकाया फीस के कारण उसकी टीसी अटकी हुई थी, जिसके चलते वह आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पा रही थी।
नीरू की समस्या सामने आने के बाद यूनिट इंचार्ज अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिखाऊ सुगम पंवार, सीआई सुनीता गुर्जर और पुलिसकर्मी प्रियंका व दुर्गा ने संबंधित निजी विद्यालय की प्रधानाध्यापिका से संपर्क किया। पुलिस टीम ने बालिका की पारिवारिक परिस्थितियों से अवगत कराते हुए फीस में रियायत देने और टीसी जारी करने का आग्रह किया।
पुलिस के प्रयासों से फीस में रियायत पर सहमति बनी और शेष राशि नीरू के ननिहाल पक्ष द्वारा किस्तों में जमा कराने की व्यवस्था की गई। इसके बाद नीरू को टीसी और मूल शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध करवाए गए। इतना ही नहीं, पुलिस टीम ने राजकीय शहीद मेजर नटवर शक्तावत विद्यालय से संपर्क कर नीरू का कक्षा 11वीं के कृषि संकाय में नियमित प्रवेश करवाने की प्रक्रिया भी पूरी करवाई।
कालिका पेट्रोलिंग यूनिट की इस पहल से नीरू के लिए आगे पढ़ाई करने का रास्ता फिर खुल गया है। यह पहल बताती है कि पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों की समस्याओं को समझकर उनके भविष्य को संवारने में भी महत्वपूर्ण हो सकती है।