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सलूंबर में मां ईडाणा का अद्भुत शक्तिपीठ, जहां होता है स्वतः अग्निस्नान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 11 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
सलूंबर में मां ईडाणा का अद्भुत शक्तिपीठ, जहां होता है स्वतः अग्निस्नान

खुले प्रांगण में विराजती हैं मां ईडाणा, अग्निस्नान की अनूठी मान्यता के चलते देशभर में प्रसिद्ध है दरबार, नवरात्र में उमड़ते हैं हजारों श्रद्धालु

सलूंबर, 11 अक्टूबर। राजस्थान के सलूंबर जिले में मेवल क्षेत्र स्थित श्री ईडाणा माताजी का शक्तिपीठ मेवाड़ के प्रमुख धार्मिक और आस्था केंद्रों में शामिल है। जिला मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। मां ईडाणा के प्रति भक्तों की गहरी आस्था है और मेवाड़, छप्पन तथा वागड़ क्षेत्र सहित दूर-दराज के इलाकों से लोग माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद माता के दरबार में पूरी होती है।

ईडाणा माताजी शक्तिपीठ की सबसे अनूठी पहचान यहां समय-समय पर होने वाली अग्नि की घटना है। श्रद्धालुओं की मान्यता के अनुसार, मंदिर में माता की प्रतिमा के आसपास स्वतः अग्नि प्रज्वलित होती है, जिसमें माता को अर्पित चुनरियां और धागे जलकर भस्म हो जाते हैं। भक्त इस घटना को मां का अग्नि स्नान मानते हैं। इसी विशेषता के चलते माता का दरबार खुले प्रांगण में स्थित है। यह अनूठा धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मां ईडाणा के दरबार में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहने की बात कही जाती है।

मंदिर परिसर में विशाल धर्मशालाएं, भोजनशाला, गौशाला और अखंड ज्योति स्थल सहित कई धार्मिक स्थल मौजूद हैं। यहां मां गायत्री मंदिर और रामदेव मंदिर भी स्थित हैं। माता की प्रतिमा के पीछे बड़ी संख्या में त्रिशूल स्थापित हैं। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूरी होने पर माता के दरबार में त्रिशूल भेंट करते हैं, जो भक्तों की आस्था और विश्वास का प्रतीक माने जाते हैं।

सामान्य दिनों में भी मंदिर में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जबकि प्रत्येक रविवार को भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान इस शक्तिपीठ का विशेष धार्मिक महत्व रहता है। इन अवसरों पर हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। नवरात्र में पैदल यात्रा कर आने वाले भक्तों की सेवा के लिए रास्ते में जगह-जगह भोजन, चाय और नाश्ते की व्यवस्था की जाती है।

स्थानीय लोग भी सेवा कार्यों में भाग लेकर श्रद्धालुओं की सहायता करते हैं।

श्री ईडाणा माताजी ट्रस्ट की ओर से नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा, सजावट और व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए विभिन्न समितियों के माध्यम से अलग-अलग गांवों को सेवा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ट्रस्ट की ओर से दर्शन व्यवस्था और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि दूर-दराज से आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

मेवल की महारानी के रूप में विख्यात मां ईडाणा का यह शक्तिपीठ धार्मिक आस्था, लोकविश्वास और मेवाड़ की सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण प्रतीक है। अग्नि स्नान की मान्यता, खुले प्रांगण में विराजमान माता और श्रद्धालुओं की सेवा से जुड़ी परंपराएं इस मंदिर को विशिष्ट पहचान देती हैं। नवरात्र के अवसर पर यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक विरासत और मां के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाती है।

बाइट :

1 अम्बालाल शर्मा, (सचिव) मंदिर ट्रस्ट 2 रानी बांसी, श्रद्धालु

3 पूजा,श्रद्धालु 5 भेरू सिंह

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।