इतिहास

संत नगर में सिंधी समाज की महिलाओं ने श्रद्धा से की शीतला सप्तमी की पूजा

लेखक: Santosh Yogi अंतिम अपडेट: 7 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
संत नगर में सिंधी समाज की महिलाओं ने श्रद्धा से की शीतला सप्तमी की पूजा

संत नगर। सिंधी समाज की महिलाओं ने शीतला सप्तमी के अवसर पर पारंपरिक विधि-विधान के साथ मां शीतला की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर महिलाओं ने परिवार और बच्चों के सुख, स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की।

शीतला सप्तमी की पूजा की परंपरा सिंधी समाज में लंबे समय से चली आ रही है। मान्यता के अनुसार, मां शीतला की पूजा परिवार को बीमारियों से सुरक्षा और सुख-समृद्धि प्रदान करने के लिए की जाती है। पहले यह पूजा नदी, तालाब और सरोवरों के किनारे की जाती थी, लेकिन अब कई स्थानों पर पंडितों के घरों में पूजा की परंपरा निभाई जाती है।

पूजा के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक गीतों का गायन किया। इसके साथ ही मक्खन, पूजा की सामग्री, मीठी कोकी सहित अन्य पारंपरिक प्रसाद पंडित को अर्पित किए गए। शीतला सप्तमी की विशेष परंपरा के अनुसार एक दिन पहले तैयार किए गए पकवानों का ही सेवन किया गया। इन पकवानों को बहन-बेटियों और मंदिरों में भी भेजा गया।

पूजा के समापन पर पल्लव की परंपरा निभाते हुए महिलाओं ने अपने परिवार और बच्चों की लंबी आयु, सुख-समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना की।

इस अवसर पर सिंधी महिला पंचायत की अध्यक्ष किरण वाधवानी ने सदस्यों के साथ कैलाश पंडित के घर पहुंचकर विधि-विधान से मां शीतला की पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने सामूहिक रूप से पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पर्व मनाया।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

संत नगर में सिंधी समाज की महिलाओं ने शीतला सप्तमी के अवसर पर मां शीतला की पूजा की, जो पारंपरिक विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुई। यह परंपरा परिवार के स्वास्थ्य, सुख और दीर्घायु की कामना के लिए की जाती है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था को उजागर करती है, जो समाज में एकजुटता और आध्यात्मिकता को बढ़ावा देती है। आम जनता के लिए यह प्रेरणा का स्रोत बन सकती है, जिससे वे अपनी परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों के महत्व को पुनः पहचानें और समाज में सांस्कृतिक समृद्धि की भावना को

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Santosh Yogi

संतोष योगी भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं जो भोपाल जिला एवं आसपास की घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं।