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'सरस चल प्रयोगशाला' करेगी मौके पर जांच

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 5 नवंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
'सरस चल प्रयोगशाला' करेगी मौके पर जांच

दीपावली और त्योहारी सीजन में मिठाइयों और डेयरी उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को शुद्ध दूध और सुरक्षित डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए जयपुर डेयरी ने एक नई पहल की है। 'सरस चल प्रयोगशाला' के जरिए अब ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध समितियों तक पहुंचकर मौके पर ही दूध की निशुल्क जांच की जा रही है। डेनमार्क से आयातित अत्याधुनिक एफटीआईआर मशीन एक ही टेस्ट में दूध के 24 मानकों की जांच कर रिपोर्ट देती है।

जयपुर, 5 नवंबर। दीपावली का त्योहार हो और मिठाइयों की बात न हो, ऐसा संभव नहीं है। घरों में पकवानों की तैयारी हो या बाजारों में मिठाइयों की खरीदारी, इन दिनों दूध और डेयरी उत्पादों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। लेकिन इसी बढ़ती मांग के साथ दूध और उससे बनने वाले उत्पादों में मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है।

ऐसे में आम उपभोक्ता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि बाजार में मिलने वाला दूध कितना शुद्ध है और उससे तैयार होने वाली मिठाइयां कितनी सुरक्षित हैं। उपभोक्ताओं की इसी चिंता को दूर करने और दूध की गुणवत्ता में पारदर्शिता लाने के लिए जयपुर डेयरी ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। डेयरी की ओर से शुरू की गई 'सरस चल प्रयोगशाला' अब ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध समितियों तक पहुंचकर मौके पर ही दूध की जांच कर रही है।

खास बात यह है कि अत्याधुनिक तकनीक से लैस यह मोबाइल प्रयोगशाला एक ही टेस्ट में दूध के 24 अलग-अलग मानकों की जांच करने में सक्षम है। त्योहारी सीजन में दूध, घी, मावा, पनीर और मिठाइयों की खपत बढ़ जाती है। बाजार में मांग बढ़ने के साथ ही मिलावटखोरों की सक्रियता की आशंका भी बनी रहती है। ऐसे में दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और मिलावट पर समय रहते रोक लगाना बेहद जरूरी हो जाता है।

जयपुर डेयरी ने इसी चुनौती को देखते हुए 'सरस चल प्रयोगशाला' की शुरुआत की है। यह मोबाइल प्रयोगशाला ग्रामीण इलाकों में संचालित दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों तक पहुंच रही है। इसका उद्देश्य दूध की गुणवत्ता की नियमित जांच करना, मिलावट की संभावनाओं को पहचानना और दुग्ध संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि अब दूध के नमूनों को जांच के लिए किसी बड़ी प्रयोगशाला तक भेजने की जरूरत नहीं है। मोबाइल वैन में ही अत्याधुनिक मशीन के जरिए मौके पर दूध की जांच की जा सकती है। इससे दुग्ध समितियों को भी तत्काल जानकारी मिलती है कि उनके यहां संग्रहित दूध निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर कितना खरा उतर रहा है।

सरस चल प्रयोगशाला की सबसे बड़ी ताकत इसमें स्थापित अत्याधुनिक एफटीआईआर मशीन है। डेनमार्क से आयातित यह मशीन फूरियर ट्रांसफॉर्म इंफ्रारेड तकनीक पर आधारित है। यह तकनीक दूध के नमूने का विश्लेषण कर एक ही टेस्ट में 24 अलग-अलग मानकों की रिपोर्ट तैयार करती है। इसमें दूध का फैट, एसएनएफ यानी सॉलिड नॉट फैट, प्रोटीन और लैक्टोज जैसे महत्वपूर्ण तत्वों की जांच की जाती है।

इसके साथ ही दूध की गुणवत्ता से जुड़े अन्य मानकों का भी विश्लेषण किया जाता है। मशीन की खासियत यह है कि जांच की प्रक्रिया बेहद कम समय में पूरी हो जाती है और दूध की गुणवत्ता से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध हो जाती है।

आमतौर पर दूध की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए फैट और एसएनएफ जैसे मानकों को देखा जाता है। लेकिन इस आधुनिक तकनीक से दूध की संरचना का अधिक विस्तृत विश्लेषण संभव हो रहा है। इससे दूध में संभावित मिलावट या गुणवत्ता में किसी तरह के बदलाव की पहचान करने में मदद मिलती है। सरस चल प्रयोगशाला केवल एक जांच वाहन नहीं, बल्कि दुग्ध समितियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की पहल भी है।

इस मोबाइल लैब के माध्यम से अब तक 600 से अधिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों का औचक निरीक्षण किया जा चुका है। जांच के दौरान अलग-अलग समितियों से दूध के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता का परीक्षण किया जाता है। मौके पर ही रिपोर्ट मिलने से दूध की गुणवत्ता को लेकर किसी तरह की आशंका या विवाद की स्थिति में भी तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध हो जाती है।

इस व्यवस्था का सीधा लाभ उन पशुपालकों को मिल रहा है, जो रोजाना अपनी मेहनत से दूध उत्पादन कर दुग्ध समितियों तक पहुंचाते हैं। दूध की गुणवत्ता की सही जानकारी मिलने से उसके फैट और एसएनएफ के आधार पर उचित मूल्य निर्धारण में मदद मिलती है। इससे पशुपालकों को उनके उत्पाद का सही दाम मिल सकेगा और दूध संग्रहण की व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।

जयपुर डेयरी की इस पहल को उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जोड़कर भी देखा जा रहा है। दूध और उससे बनने वाले उत्पाद हर घर की जरूरत हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और परिवार के अन्य सदस्यों के दैनिक खानपान में दूध की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में दूध की शुद्धता सुनिश्चित करना केवल डेयरी कारोबार से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।

त्योहारों के दौरान जब मिठाइयों और अन्य दुग्ध उत्पादों की खपत बढ़ती है, तब दूध की गुणवत्ता की निगरानी और भी जरूरी हो जाती है। सरस चल प्रयोगशाला के जरिए दुग्ध समितियों के स्तर पर ही जांच की सुविधा उपलब्ध होने से गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया को मजबूत किया जा रहा है। हालांकि, दूध की जांच के साथ-साथ बाजार में बिकने वाले मावा, पनीर, घी और मिठाइयों की गुणवत्ता पर निगरानी के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच और कार्रवाई भी जरूरी है।

ऐसे में डेयरी की यह पहल दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।

मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि सरस चल प्रयोगशाला में लगाई गई एफटीआईआर मशीन इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता है। डेनमार्क से आयातित यह मशीन एक ही टेस्ट में दूध के 24 अलग-अलग मानकों की जांच करने में सक्षम है। इससे दूध की गुणवत्ता का सटीक आकलन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मोबाइल प्रयोगशाला के माध्यम से दुग्ध समितियों का औचक निरीक्षण किया जा रहा है, जिससे दूध में मिलावट की संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और पशुपालकों को उचित मूल्य दिलाने में मदद मिल रही है।

कुल मिलाकर, सरस चल प्रयोगशाला के जरिए जयपुर डेयरी ने दूध की गुणवत्ता जांच को प्रयोगशालाओं से निकालकर सीधे ग्रामीण क्षेत्रों और दुग्ध समितियों तक पहुंचाने का प्रयास किया है। अत्याधुनिक तकनीक, मौके पर जांच और पारदर्शी रिपोर्टिंग की यह व्यवस्था पशुपालकों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर जब हर घर में मिठास घोलने की तैयारी होती है, तब शुद्ध दूध और सुरक्षित डेयरी उत्पादों की उपलब्धता सबसे ज्यादा मायने रखती है। ऐसे में सरस चल प्रयोगशाला की यह पहल मिलावट पर अंकुश लगाने के साथ ही दूध की गुणवत्ता के प्रति भरोसा बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।

बाइट – जोराराम कुमावत, कैबिनेट मंत्री (पशुपालन विभाग)

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।