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सरिया, सीमेंट से लेकर रेत तक महंगा, घर बनाना हुआ जेब पर भारी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 5 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: जनता का संदेश
सरिया, सीमेंट से लेकर रेत तक महंगा, घर बनाना हुआ जेब पर भारी

अपना घर बनाना आज के समय में पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है.

पिछले 5 साल में घरों की कीमत जिस तेजी से बढ़ी है, उसने आम खरीदारों का बजट बिगाड़ दिया है.

अनारॉक रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच देश के सात बड़े शहरों में घरों के औसत दाम 59% बढ़े हैं. वहीं, घर बनाने के खर्च में 34% की बढ़ोतरी हुई.

यानी घरों की कीमत बढ़ने की रफ्तार बनाने के खर्च से काफी ज्यादा रही है.

प्रॉपर्टी की कीमत साल का करीब 12% की दर से बढ़ी, जबकि घर बनाने के खर्च में साल का बढ़ोतरी करीब 6.9% रही.

यानी घर की कीमत और उसे बनाने के खर्च के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है.

इस बढ़ोतरी में बनाने के खर्च की हिस्सेदारी करीब 66% रही, जबकि बाकी 34% में जमीन की कीमत, डेवलपर का मार्जिन और मांग सप्लाई जैसे वजह शामिल हैं.

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जमीन की कीमत ने बढ़ाई परेशानी

2021 से 2026 की पहले 6 महीने तक 7 प्रमुख शहरों में जमीन की कीमत करीब 50% से 120% तक बढ़ी.

NCR में जमीन के दाम करीब 70% से 130% और बेंगलुरु में 60% से 120% तक बढ़े.

खासकर अच्छी कनेक्टिविटी और नए इंफ्रास्ट्रक्चर वाले इलाकों में जमीन तेजी से महंगी हुई है.

2021 में 1,000 वर्ग फुट का घर औसतन करीब 58.3 लाख का पड़ता था. 2025 में यही कीमत बढ़कर लगभग 92.6 लाख हो गई. यानी 5 साल में करीब 34 लाख से ज्यादा का फर्क आया.

इससे खरीदारों को ज्यादा डाउन पेमेंट और बड़ा होम लोन लेना पड़ सकता है, जिससे EMI भी बढ़ेगी.

आगे और बढ़ सकता है घर बनाने का खर्च

अनारॉक का अनुमान है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव से घर बनाने के खर्च में 8% से 10% तक और बढ़ोतरी हो सकती है.

स्टील की कीमत करीब

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

📰 पूरी खबर पढ़ें (ABP Live Vyapar पर जाएं)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

घर बनाने की लागत में तेज बढ़ोतरी, खासकर सिमेंट और रेत जैसी मूलभूत सामग्रियों की कीमतों में उछाल, आज के समय में आवास निर्माण को एक कठिन वित्तीय चुनौती बना रही है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न केवल व्यक्तिगत बजट को प्रभावित करता है बल्कि समग्र रियल एस्टेट बाजार और आर्थिक स्थिरता पर भी असर डालता है। आम जनता के लिए इसका मतलब है कि घर खरीदना या बनाना अब अधिक महंगा हो गया है, जिससे कई परिवारों को या तो बड़े ऋण लेने पड़ेंगे या फिर आवास योजनाओं पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे उनके आर्थिक निर्णय

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