देश

सर्वोच्च न्यायालय ने बच्चों को सोशल मीडिया से जुड़े जोखिमों से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाया

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 16 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
सर्वोच्च न्यायालय ने बच्चों को सोशल मीडिया से जुड़े जोखिमों से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाया

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने महिला और बाल विकास मंत्रालय तथा कानून तथा न्याय मंत्रालय को नोटिस जारी किए हैं। पीठ ने इस याचिका को इसी विषय से संबंधित लंबित याचिका के साथ जोड़ते हुए सात दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

इंदौर के एक स्कूल के निदेशक की ओर से दायर इस याचिका में कम उम्र के बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच, साइबर बुलिंग, बहलाकर बच्चों का शोषण करना, यौन शोषण और स्क्रीन पर अत्यधिक समय बिताने को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।

याचिका में अनिवार्य आयु सत्यापन, माता-पिता की सहमति की प्रमाणिक पुष्टि और सोशल मीडिया खाते बनाने के लिए उम्र के आधार पर कड़े प्रतिबंध लागू करने की मांग की गई है। इसका उद्देश्य ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के डिजाइन पर अंकुश लगाना है, जो उपयोगकर्ताओं को बार-बार सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करते हैं।

याचिका में कहा गया है कि स्कूल और अभिभावक इन डिजिटल प्लेटफॉर्म से उत्पन्न जोखिमों से अकेले नहीं निपट सकते। इसमें सर्वोच्च न्यायालय से केंद्र सरकार को एक समर्पित और प्रभावी नियामक ढांचा तैयार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। इसके तहत निर्धारित आयु से कम बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने और अधिक उम्र के नाबालिगों के उपयोग को विनियमित करने की मांग की गई है।

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।