अपराध

सत्य निकेतन हादसा: 7 छात्रों की मौत के बाद जागा सिस्टम या अगली त्रासदी का इंतजार?

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 23 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
सत्य निकेतन हादसा: 7 छात्रों की मौत के बाद जागा सिस्टम या अगली त्रासदी का इंतजार?

दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को गिरी एक इमारत ने सिर्फ सात लोगों की जान नहीं ली, बल्कि राजधानी में चल रहे अवैध निर्माण और जर्जर पीजी सिस्टम की भयावह सच्चाई भी उजागर कर दी.

इस हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी और दिल्ली सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं.

कोर्ट जानना चाहता है कि आखिर ऐसे खतरनाक ढांचों को लेकर प्रशासन कब जागेगा, क्योंकि जिस इमारत ने सात लोगों को मौत के मुंह में धकेला, उसके आसपास आज भी कई ऐसी इमारतें खड़ी हैं जो कभी भी अगला हादसा बन सकती हैं.

हादसे वाली बिल्डिंग के ठीक बगल में स्थित 12 और 13 नंबर की इमारतों को भी एमसीडी ने खतरनाक माना है. दोनों को तीन दिन का नोटिस जारी किया गया है.

फिलहाल इन्हें लोहे के गार्डरों के सहारे टिकाया गया है.

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन को इन इमारतों की वास्तविक स्थिति अब पता चली है? क्या सात लोगों की मौत के बाद ही सिस्टम की नींद खुली है?

नींद से कब जागेगा सिस्टम?

सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस का प्रमुख छात्र केंद्र है.

यहां श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, जीसस एंड मैरी कॉलेज, मैत्रेयी कॉलेज, आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज, राम लाल आनंद कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और आर्यभट्ट कॉलेज जैसे सात बड़े कॉलेज मौजूद हैं.

लेकिन इन सात कॉलेजों में सिर्फ दो कॉलेजों में हॉस्टल की सुविधा है.

वेंकटेश्वर कॉलेज में लगभग 175 सीटें हैं, जबकि मैत्रेयी कॉलेज में केवल 27 सीटें उपलब्ध हैं.

ऐसे में हजारों छात्र मजबूरन निजी पीजी और हॉस्टलों में रहने को विवश हैं.

यही मजबूरी इलाके में पीजी कारोबार का सबसे बड़ा आधार बन चुकी है.

इलाके के कई मकान मालिक खुद कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं और अपने मकानों को पीजी में बदलकर मोटी कमाई कर रहे हैं.

अनुमान है कि सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में 200 से ज्यादा पीजी और प्राइवेट हॉस्टल संचालित हो रहे हैं, जिनमें करीब 8 से 10 हजार छात्र रहते हैं.

<p s

📡 स्रोत: ABP Live

📰 पूरी खबर पढ़ें (ABP Live पर जाएं)

🎙️ जनता का संदेश का मत

सत्य निकेतन की इस त्रासदी से हमें यह सिखने को मिलता है कि अवैध निर्माण और जर्जर इमारतें केवल आँकड़ों में नहीं, बल्कि जीवन में भी खतरे पैदा करती हैं। हमें न केवल कानूनी नियमों का पालन करना चाहिए, बल्कि स्वयं भी जागरूक रहकर अनियमित कार्यों की रिपोर्ट करनी चाहिए। जब हम मिलकर सुरक्षा मानकों को लागू करेंगे, तब ऐसी दुर्घटनाएँ रोकी जा सकती हैं। इस दुखद घटना के पीड़ितों के परिवारों को हमारी संवेदनशील सहानुभूति और समर्थन की आवश्यकता है।

J
JKS News Desk

जनता का संदेश की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।