सत्य निकेतन हादसे से टूटे शिखर धवन, बोले- 'जिन परिवारों ने अपनों को खोया...'
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
भारत की राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार (06 सितंबर) को 50 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत के गिरने से बड़ा हादसा हुआ.
लड़कों की पीजी (पेइंग गेस्ट) के रूप में इस्तेमाल हो रही इमारत के गिरने से कुछ लोगों की जान चली गई, जबकि कई घायल हुए हैं.
इस घटना ने पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे बरती जा सकती है? इस हादसे पर सभी अपना-अपना दुख जाहिर कर रहे हैं. टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी शिखर धवन ने भी इस घटना पर दुख जताया.
धवन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की.
उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवार के लिए हिम्मत की प्रार्थना की, जबकि मलवे में फंसे लोगों के सुरक्षित निकले की कामना की.
धवन ने लिखा, "सत्य निकेतन से आई खबर से बहुत दुख हुआ है.
जिन परिवारों ने अपने प्यारों को खोया, उनके लिए हिम्मत की प्रार्थना कर रहा हूं और जो लोग अभी भी फंसे हुए हैं, उनके सुरक्षित बचाव की भी कामना करता हूं."
Deeply saddened by the news from Satya Niketan.
Praying for strength for the families who have lost loved ones, and the safe rescue of everyone still trapped. 🙏
Shikhar Dhawan (@SDhawan25) September 6, 2026
5 लोगों के मरने की खबर
इस खबर को लिखे जाने तक हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या 5 पर पहुंच गई है. जेपीएन एपेक्स ट्रॉमा सेंटर (AIIMS) में इस घटना के 10 मरीज पहुंचे थे. इसमें 4 मृत अवस्था में थे.
बाकी 1 ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. इस तरह 5 लोगों की जान जा चुकी है.
बाकी 5 घायलों में एक को मामूली चोटें लगी थीं, जिसे देखरेख के बाद छुट्टी दे दी गई. वहीं एक मरीज के अंगों की सर्जरी की भी खबर है.
चल रहा था मरम्मत
📡 स्रोत: ABP Live Khel
💡 पृष्ठभूमि (Background)
सत्य निकेतन में 50‑वर्षीय पाँच‑मंज़िला इमारत के गिरने से कई लोगों की जान गई और कई घायल हुए। यह घटना दिल्ली के एक आवासीय क्षेत्र में हुई, जहाँ इमारत को छात्रों के लिए PG (पेइंग गेस्ट) के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत में भवन सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और लापरवाही को उजागर करती है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा पर सवाल उठते हैं। आम जनता पर इसका असर गहरा है: लोगों को भवनों की स्थिति पर सतर्क रहने की आवश्यकता महसूस होगी, और सरकार पर भवन निरीक्षण और नियमन को सख्त करने क