शहडोल जिले के किसानों से नरवाई नहीं जलाने की अपील
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फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाली नरवाई को जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में मददगार हो सकता है। कृषि वैज्ञानिक बी.के. प्रजापति ने शहडोल जिले के किसानों से नरवाई नहीं जलाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि नरवाई जलाने से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट होते हैं और जैविक पदार्थों की मात्रा घटती है।
इससे मिट्टी की संरचना, उर्वरता और जलधारण क्षमता प्रभावित होने के साथ वायु प्रदूषण भी बढ़ता है। नरवाई प्रबंधन के लिए सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज सीड ड्रिल, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम और रोटावेटर जैसे कृषि यंत्रों का उपयोग किया जा सकता है। स्ट्रॉरीपर की मदद से भूसा भी तैयार किया जा सकता है।
इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ कृषि लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
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शहडोल जिले के किसानों से नरवाई नहीं जलाने की अपील
फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन कर बचाएं पर्यावरण और मिट्टी
💡 पृष्ठभूमि (Background)
नरवाई जलाने की प्रथा से मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं, जिससे उर्वरता घटती है। शहडोल जिले के किसान बी.के. प्रजापति की अपील के तहत, फसल कटाई के बाद बची नरवाई को जलाने के बजाय उचित प्रबंधन से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि सतत कृषि के लिए मिट्टी की संरचना और जलधारण क्षमता बनाए रखना आवश्यक है। यदि किसान नरवाई को जलाना बंद कर दें तो मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ेगा, जिससे फसल की पैदावार स्थिर रहेगी और किसानों की आय में सुधार संभव है।