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शाहजहांपुर में पुलिस कर्मियों को सिखाई गई सांकेतिक भाषा

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
शाहजहांपुर में पुलिस कर्मियों को सिखाई गई सांकेतिक भाषा

शाहजहांपुर में अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के मौके पर रिजर्व पुलिस लाइन में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सांकेतिक भाषा सिखाई गई।अखिल उत्तर प्रदेश बधिर संस्था के सदस्यों ने पुलिस कर्मियों को अलग-अलग संकेतों और उनके इस्तेमाल की जानकारी दी।

इसका उद्देश्य श्रवण और वाक् बाधित लोगों से आसानी से बातचीत करना और उनकी समस्याओं को समझना है, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें पुलिस की मदद मिल सके।कार्यक्रम में प्रशिक्षण देने वाले संस्था के सदस्यों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रशिक्षण में उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

शाहजहांपुर में पुलिस कर्मियों को सिखाई गई सांकेतिक भाषा एक ऐसी पहल है जिसमें अधिकारियों को बधिर एवं वाक् बाधित लोगों के साथ संवाद करने हेतु संकेत भाषा सिखाई गई। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर रिजर्व पुलिस लाइन में एक दिवसीय प्रशिक्षण के रूप में आयोजित किया गया। इस खबर का महत्व यह है कि पुलिस और जनता के बीच संवाद की खाई को पाटकर आपसी समझ और सहयोग बढ़ाया जा सके। इससे आम जनता को यह आशा मिलेगी कि पुलिस बधिर समुदाय की समस्याओं को बेहतर ढंग से पहचानकर समाधान दे सकेगी, जिससे

🎙️ जनता का संदेश का मत

शाहजहांपुर में पुलिस को सांकेतिक भाषा सिखाने का कदम सुनने में अक्षम लोगों के साथ संवाद को आसान बनाता है, जिससे उनकी समस्याओं का समाधान भी सरल होता है। यह पहल हमें याद दिलाती है कि समावेशी समाज केवल कानूनों से नहीं, बल्कि सहानुभूति और संवाद से बनता है। यदि हम हर आवाज़ को सुनने के लिए तैयार हों, तो समाज में भेदभाव और गलतफहमी कम होगी, और सभी को समान अवसर मिलेगा।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।