शामली में रबी अभियान के लिए 7112 टन यूरिया:2411 टन डीएपी और 333 टन एनपीके उपलब्ध; कालाबाजारी और जमाखोरी पर रहेगी निगरानी
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →शामली में रबी अभियान के मद्देनजर जिले में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा के लिए शुक्रवार को जिलाधिकारी आलोक यादव की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें जिला कृषि अधिकारी प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि जिले में 7112.622 मीट्रिक टन यूरिया, 2411.950 मीट्रिक टन डीएपी और 333.60 मीट्रिक टन एनपीके का स्टॉक उपलब्ध है।
किसानों की मांग को देखते हुए 1340.01 मीट्रिक टन यूरिया की एक रैक शनिवार शाम तक शामली पहुंचने की संभावना है। डीएम ने उर्वरकों की बिक्री में पारदर्शिता बनाए रखने और कालाबाजारी व जमाखोरी रोकने के निर्देश दिए। जिला कृषि अधिकारी के मुताबिक, जसाला स्थित बफर गोदाम में सामान्य और प्री-पोजिशनिंग स्टॉक मिलाकर 3458.385 मीट्रिक टन यूरिया रखा हुआ है।
इसके अलावा गोदाम में 521.90 मीट्रिक टन डीएपी भी उपलब्ध है। विभाग के अनुसार, जिले में रबी फसलों की बुवाई के दौरान किसानों की जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि 1340.01 मीट्रिक टन यूरिया की रैक शनिवार, 10 अक्टूबर की शाम तक शामली के रैक प्वाइंट पर पहुंचने की संभावना है।
इस खेप में यूरिया के कुल 29,778 बैग शामिल हैं। इससे किसानों की मांग के अनुरूप खाद की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी। बैठक में इफको के उप क्षेत्र प्रबंधक ने भी आगामी सप्ताह में डीएपी और एनपीके की एक-एक रैक आने की जानकारी दी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि उर्वरकों की आपूर्ति और वितरण पर नजर रखी जाए, ताकि किसानों को जरूरत के समय खाद मिलने में परेशानी न हो।
सहकारी और गन्ना समितियों को मांग के अनुसार भेजा जा रहा खाद बैठक में सहायक आयुक्त सहकारिता ने बताया कि सहकारी समितियों पर सभी प्रकार के उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। किसानों की मांग के अनुसार समितियों को खाद भेजा जा रहा है। वहीं, जिला गन्ना अधिकारी ने जानकारी दी कि गन्ना समितियों को भी आवंटित मात्रा के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है।
डीएम आलोक यादव ने उर्वरक विक्रेताओं को बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बिक्री पर कैश मेमो देना अनिवार्य होगा। सभी विक्रेताओं को पीओएस मशीन के माध्यम से ही खाद बेचने और स्टॉक रजिस्टर नियमित रूप से अपडेट रखने को कहा गया। साथ ही किसानों को उनकी कृषि भूमि के रकबे के अनुसार ही उर्वरक देने के निर्देश दिए गए।
प्रति हेक्टेयर के हिसाब से खाद की सीमा बैठक में शासन के 30 सितंबर 2025 के आदेश का हवाला देते हुए बताया गया कि प्रति हेक्टेयर कृषि भूमि के आधार पर एक किसान को अधिकतम पांच बैग डीएपी और सात बैग यूरिया देने का प्रावधान है। निर्धारित मात्रा से अधिक उर्वरक का भंडारण करने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को उर्वरकों की कालाबाजारी और अनावश्यक भंडारण रोकने के लिए लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों से भी अपील की कि वे फसलों में संतुलित मात्रा में खाद का इस्तेमाल करें। बुवाई के दौरान एनपीके और एसएसपी जैसे उर्वरकों के प्रयोग पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इससे मिट्टी को आवश्यक पोषक तत्वों के साथ सल्फर भी मिल सकता है।
किसानों से जरूरत के अनुसार ही खाद खरीदने और अनावश्यक भंडारण से बचने की अपील की गई। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
📡 स्रोत: NewsData.io