SHANTI Act से परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी के नए अवसर खुलेंगे: डॉ. जितेंद्र सिंह
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अक्टूबर 29, नई दिल्ली: विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत अपनी क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ अंतरिक्ष, परमाणु विज्ञान और समुद्री क्षेत्र की उभरती चुनौतियों से निपटने की दिशा में भी काम कर रहा है। नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC 2026) के तीसरे और अंतिम दिन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मानव अंतरिक्ष अभियानों के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष चिकित्सा को अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विभाग और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के बीच हुआ समझौता ज्ञापन (एमओयू) अंतरिक्ष में रहने के दौरान सामने आने वाली चिकित्सा संबंधी चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर डॉ. सिंह ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में किए गए कार्यों पर आधारित दो रिपोर्टों का भी अनावरण किया। उन्होंने आम लोगों के हित में भारत के परमाणु क्षेत्र का विस्तार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शांति अधिनियम (SHANTI Act) से भारत के परमाणु क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी के नए अवसर खुल सकते हैं। इनमें परमाणु चिकित्सा का क्षेत्र भी शामिल है। उन्होंने कहा कि परमाणु प्रौद्योगिकी का उपयोग केवल रिएक्टरों और परमाणु ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के माध्यम से लोगों की जान बचाने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। इस दिशा में निजी क्षेत्र की भागीदारी अहम साबित हो सकती है।
तीन दिवसीय ESTIC का यह दूसरा संस्करण है। इसकी शुरुआत पिछले वर्ष हुई थी। इस वर्ष सम्मेलन में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार से जुड़े 13 मंत्रालयों ने भाग लिया।
(वीडियो कैप्शन: विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत अपनी क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ अंतरिक्ष, परमाणु विज्ञान और समुद्री क्षेत्र की उभरती चुनौतियों से निपटने की दिशा में भी काम कर रहा है।)