विदेश

शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन के लिए पांच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मंजूरी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 4 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन के लिए पांच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मंजूरी

अक्टूबर 04, नई दिल्ली: शिक्षा मंत्रालय ने शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन और शोध को बढ़ावा देने के लिए पांच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मंजूरी दी है। इन केंद्रों में शास्त्रीय असमिया, बंगाली, मराठी, पाली और प्राकृत भाषाओं का अध्ययन किया जाएगा।

ये सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तेजपुर विश्वविद्यालय, विश्व-भारती विश्वविद्यालय, डेक्कन कॉलेज पुणे, केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा और केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात में स्थापित किए जाएंगे।

इन केंद्रों का उद्देश्य शास्त्रीय भाषाओं में उच्च स्तरीय शोध को बढ़ावा देना, भाषाई और साहित्यिक विरासत का संरक्षण करना तथा प्राचीन ज्ञान और साहित्य के डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाना है। इसके साथ ही, इन भाषाओं से जुड़े ज्ञान और शोध को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा। फ़ाइल फ़ोटो

💡 पृष्ठभूमि (Background)

शास्त्रीय भाषाओं का अध्ययन और शोध को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने पाँच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मंजूरी दी है, जिनमें शास्त्रीय असमिया, बंगाली, मराठी, पाली और प्राकृत भाषाएँ शामिल हैं। यह पहल भारत की समृद्ध भाषाई विरासत को संरक्षित और विकसित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इन केंद्रों के माध्यम से विद्वानों को शोध के लिये बेहतर संसाधन और सहयोग मिलेगा, जिससे शास्त्रीय साहित्य, इतिहास और संस्कृति पर गहन अध्ययन संभव होगा। आम जनता को इससे सांस्कृतिक पहचान, भाषा संरक्षण और शैक्षणिक अवसरों में वृद्

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।