शीला दीदी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
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बाराबंकी के देवा ब्लॉक के मुजफ्फर मऊ गांव की शीला देवी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी हैं। वर्ष 2018 में एनआरएलएम के तहत रविदास स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने सिलाई मशीन से अपना सफर शुरू किया और जूट बैग व दोना-पत्तल का कारोबार खड़ा किया। आज उनका कारोबार करीब 8 से 10 लाख रुपये का है और 40 से 50 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। हर महीने 25 से 30 हजार रुपये की बचत करने वाली शीला देवी ‘लखपति दीदी’ अभियान की प्रेरणादायी मिसाल बन गई हैं।