शिवपुरी के मड़ीखेड़ा डैम के 4 गेट खुलेः 654.49 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा; जिले में सामान्य से 30.23 मिमी ज्यादा बारिश
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शिवपुरी जिले में पिछले 24 घंटे में हुई बारिश के बाद इस सीजन की औसत वर्षा 846.53 मिमी पहुंच गई है। यह जिले की सामान्य औसत वर्षा 816.3 मिमी से 30.23 मिमी ज्यादा है। लगातार बारिश के कारण शनिवार सुबह सिंध परियोजना के अटल सागर मड़ीखेड़ा डैम का जलस्तर भी बढ़ गया है। डैम से कुल 654,494 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है।
भू-अभिलेख विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार तक जिले में औसत वर्षा 764.46 मिमी थी। पिछले 24 घंटे में इसमें 82.07 मिमी की बढ़ोतरी हुई। 5 सितंबर को यह आंकड़ा 846.53 मिमी हो गया।
सुबह 11 बजे मड़ीखेड़ा डैम का जलस्तर 345.10 मीटर दर्ज किया गया। डैम का फुल रिजर्वायर लेवल (FRL) 346.25 मीटर है। यानी, जलस्तर FRL से करीब 1.15 मीटर नीचे है।
डैम के चार गेट खोले गए
डैम में 755.40 मिलियन घन मीटर लाइव स्टोरेज उपलब्ध है। यह कुल 834.83 मिलियन घन मीटर की क्षमता का 90.49 प्रतिशत है।
डैम के गेट 4 सितंबर की शाम 3:30 बजे से खोले गए हैं। 5 सितंबर को सुबह 10 बजे की स्थिति में गेट नंबर 5 और 6 को 1.25-1.25 मीटर खोला गया। वहीं, गेट नंबर 4 और 7 को 0.75-0.75 मीटर खोला गया है। गेट नंबर 3 और 8 अभी बंद हैं। इस तरह कुल गेट ओपनिंग 4 मीटर है।
गेटों से 519.074 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा, पावर हाउस की मशीनों से 135.42 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। दोनों को मिलाकर मड़ीखेड़ा डैम से कुल 654.494 क्यूमेक्स पानी प्रति सेकंड की दर से डाउनस्ट्रीम में छोड़ा जा रहा है।
जिले के बदरवास में सबसे ज्यादा बारिश तहसीलवार बारिश के आंकड़ों में बदरवास 916.50 मिमी के साथ सबसे आगे है। शिवपुरी में 892.70, पिछोर में 882, नरवर में 872, करैरा में 870.10, पोहरी में 845, बैराड़ में 842, खनियाधाना में 758.50 और कोलारस में 740 मिमी बारिश दर्ज हुई है।
जिले में बारिश के आंकड़े सामान्य औसत से ऊपर पहुंच गए हैं। मड़ीखेड़ा डैम भी अपनी कुल जलभराव क्षमता के 90.49 प्रतिशत तक भर चुका है और डैम से पानी की निकासी जारी है।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
शिवपुरी जिले के मड़ीखेड़ा डैम के चार गेट खुले हैं, जिससे 654,494 क्यूबिक मीटर पानी छोड़ा जा रहा है। यह घटना लगातार बारिश के बाद हुई है, जिसके कारण डैम का जलस्तर बढ़ गया। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि जिले की वर्षा सामान्य से 30.23 मिमी अधिक है, जिससे जल संसाधन प्रबंधन और बाढ़ जोखिम पर असर पड़ता है। आम जनता पर इसका असर दोहरा है: एक ओर कृषि और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकता है, दूसरी ओर बाढ़ और बाढ़ से संबंधित दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।