SHO से बातचीत के दौरान बिगड़ी व्यक्ति की तबीयत:रामपुर में पत्नी बोली- पुलिस ने दबाव बनाया, आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →रामपुर के टांडा में रविवार को एक व्यक्ति की हालत SHO से बातचीत के दौरान बिगड़ गई। पुलिसकर्मी उसे तुरंत अस्पताल ले गए। पहले निजी अस्पताल, फिर टांडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और आखिर में जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल में व्यक्ति को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया है। कैलाश की पत्नी गोमती ने बताया कि रविवार सुबह करीब नौ बजे दो पुलिसकर्मी उनके घर आए थे।
दोपहर एक बजे एक दरोगा और कुछ पुलिसकर्मी पहुंचे। शाम करीब तीन बजे टांडा थाना प्रभारी बलबन सिंह पुलिसकर्मियों के साथ घर पहुंचे और कैलाश से बात करने लगे। गोमती के अनुसार, तेज आवाज में बातचीत के दौरान अचानक कैलाश की तबीयत खराब हो गई। गोमती ने बताया कि हालत बिगड़ने पर थाना प्रभारी बलबन सिंह अपनी कार से कैलाश को निजी अस्पताल ले गए।
वहां से उन्हें टांडा के सरकारी अस्पताल भेजा गया, जहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। कैलाश को सरकारी एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया है। गोमती ने यह भी बताया कि 21 तारीख को उनकी बेटी का शव गांव के पास एक पेड़ से मिला था। इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
पुलिस ने अनिल नाम के युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन अनिल के दोस्त विनोद और उसके पिता को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। गोमती का आरोप है कि पुलिस उन पर दबाव बना रही है और कह रही है कि बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कोई सबूत नहीं है। महिला रविवार रात करीब आठ बजे इस मामले की शिकायत लेकर एसपी कार्यालय पहुंची थी।
वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें अगले दिन सुबह शिकायत दर्ज कराने को कहा। महिला ने दोनों आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं, टांडा थाना प्रभारी बलवंत सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले कैलाश का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने आत्मदाह की बात कही थी। तभी से पुलिस टीम उन पर नजर रख रही है, ताकि वह कोई गलत कदम न उठाएं।
पुलिस उनकी सुरक्षा में लगी है।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ जनता का संदेश का मत
रामपुर की इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि जब किसी की तबीयत बिगड़ती है तो पुलिस को न केवल त्वरित चिकित्सा सहायता देनी चाहिए, बल्कि परिवार को भी समझदारी से मार्गदर्शन करना चाहिए। हिंसा या गलतफहमी के समय संवाद और कानूनी रास्तों का सहारा लेना चाहिए, न कि दहशत या दबाव। समाज को सहानुभूति और सहयोग की भावना से जोड़ना चाहिए, ताकि हर व्यक्ति सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।