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सीड ने जारी किया रिपोर्ट, झारखंड में गर्मी से 9.35 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक नुकसान का अनुमान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 14 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
सीड ने जारी किया रिपोर्ट, झारखंड में गर्मी से 9.35 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक नुकसान का अनुमान

सीड की रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में वर्ष 2047-48 तक अत्यधिक गर्मी से श्रम उत्पादकता में कमी के कारण 9.35 लाख करोड़ रुपये तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है। निर्माण, कृषि, विनिर्माण और खनन क्षेत्र पर सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है।

Short Headline: सीड ने जारी किया रिपोर्ट, झारखंड में गर्मी से 9.35 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक नुकसान का अनुमा

14 अक्टूबर, रांची: झारखंड में अत्यधिक गर्मी के कारण श्रमिकों की कार्यक्षमता में कमी से वर्ष 2011-12 से 2022-23 के बीच अनुमानित 1.76 लाख करोड़ रुपये का कुल आर्थिक नुकसान हुआ। सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 से 2047-48 के बीच यह नुकसान बढ़कर 9.35 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट में निर्माण, कृषि, विनिर्माण और खनन जैसे श्रम-आधारित क्षेत्रों पर गर्मी के प्रभाव को रेखांकित किया गया है।

झारखंड में अत्यधिक गर्मी अब केवल स्वास्थ्य और जलवायु की समस्या नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बन रही है। सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट यानी सीड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2011-12 से 2022-23 के बीच गर्मी के कारण श्रम उत्पादकता में कमी से राज्य को अनुमानित 1.76 लाख करोड़ रुपये का कुल आर्थिक नुकसान हुआ। वहीं, वर्ष 2047-48 तक यह नुकसान बढ़कर 9.35 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। रांची में आयोजित एक परिचर्चा के दौरान रिपोर्ट जारी की गई, जिसमें गर्मी से निपटने के लिए प्रभावी योजनाएं बनाने पर जोर दिया गया।

रांची में ‘राइजिंग हीट एंड इकोनॉमिक इम्पैक्ट: टुवर्ड्स हीट रेसिलिएंट झारखंड’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में सीड ने अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2011-12 से 2022-23 के बीच गर्मी के कारण हुए कुल आर्थिक नुकसान में 87 हजार करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष नुकसान शामिल है। यह इस अवधि के सकल राज्य मूल्य वर्धित यानी जीएसवीए का 3.97 प्रतिशत है। निर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी कुल नुकसान में 25 प्रतिशत रही, जबकि कृषि, वानिकी एवं मत्स्यपालन क्षेत्र का योगदान 11 प्रतिशत, परिवहन और संचार का 10 प्रतिशत, विनिर्माण का 8 प्रतिशत और खनन क्षेत्र का 7 प्रतिशत रहा।

रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वर्ष 2023-24 से 2047-48 के बीच गर्मी के कारण श्रम उत्पादकता में कमी से झारखंड को 9.35 लाख करोड़ रुपये तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसमें 4.70 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष नुकसान का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी के कारण काम के घंटे कम होना, श्रमिकों की कार्यक्षमता घटना, निर्माण कार्यों में देरी और कृषि उत्पादन प्रभावित होना आर्थिक नुकसान के प्रमुख कारण हैं। इसका सबसे अधिक असर उन क्षेत्रों और समुदायों पर पड़ता है, जिनकी आजीविका शारीरिक श्रम और खुले में किए जाने वाले कामों पर निर्भर है।

परिचर्चा में गर्मी के बढ़ते आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए जिला स्तर पर हीट एक्शन प्लान तैयार करने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत बताई गई। झारखंड सरकार के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं जलवायु परिवर्तन के नोडल अधिकारी रवि रंजन ने श्रमिकों की सुरक्षा के लिए दूरदर्शी योजना और समय रहते बचाव के उपायों पर जोर दिया। वहीं, सीड के सीईओ रमापति कुमार ने कहा कि जलवायु अनुकूलन के लिए सरकारी विभागों के बीच समन्वय और बजट नियोजन में गर्मी के प्रभावों को शामिल करना जरूरी है।

परिचर्चा में शहरों और गांवों की विकास योजनाओं, औद्योगिक क्षेत्रों तथा सार्वजनिक कार्यस्थलों पर गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की जरूरत बताई गई। प्रतिभागियों ने श्रमिकों के लिए छायादार स्थान, पेयजल, पर्याप्त विश्राम और काम के समय में जरूरी बदलाव जैसे उपायों पर जोर दिया। विशेषज्ञों के मुताबिक, समय रहते प्रभावी कदम उठाकर गर्मी से होने वाले सामाजिक और आर्थिक नुकसान को कम किया जा सकता है।

परिचर्चा में रिपोर्ट प्रस्तुतकर्ता शिखर सिंह, अर्थशास्त्री डॉ. हरीश्वर दयाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं नोडल अधिकारी, जलवायु परिवर्तन रवि रंजन, सीड के सीईओ रमापति कुमार समेत कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।