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सीधी- स्वसहायता समूह से जुड़कर गुड़िया साकेत ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 12 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: जनता का संदेश
सीधी- स्वसहायता समूह से जुड़कर गुड़िया साकेत ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

सीधी। कभी आर्थिक तंगी से परेशान रहने वाली गुड़िया आज विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं और बचत भी कर पा रही हैं। गुड़िया साकेत बताती हैं कि स्वसहायता समूह से जुड़ने से पहले वे केवल खेती का काम करती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, जिसके कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

इसी दौरान गांव में आजीविका मिशन के कर्मचारियों ने महिलाओं को स्वसहायता समूह के गठन और उससे मिलने वाले लाभों की जानकारी दी। सीआरपी दीदी के मार्गदर्शन में गांव में आरती स्वसहायता समूह का गठन हुआ, जिसमें गुड़िया भी शामिल हो गईं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत करना शुरू किया और धीरे-धीरे आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने की दिशा में कदम बढ़ाए।

समूह गठन के लगभग तीन माह बाद समूह को 5 हजार रुपये की रिवॉल्विंग फंड (आरएफ) राशि प्राप्त हुई। इसमें से गुड़िया को भी राशि मिली, जिसका उपयोग उन्होंने किराना सामग्री खरीदने में किया। इसके साथ ही उन्होंने श्रृंगार सामग्री और गिफ्ट पैकिंग से संबंधित सामान तैयार कर बाजार में बेचना शुरू किया। इस व्यवसाय से होने वाली आय से उन्होंने समूह से प्राप्त आरएफ की राशि वापस कर दी।

इसके बाद समूह को 40 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) प्राप्त हुई। इसमें से मिली राशि का उपयोग गुड़िया ने अपनी आजीविका गतिविधियों को बढ़ाने में किया। उन्होंने अपनी दुकान का विस्तार किया और किराना व्यवसाय को बड़े स्तर पर शुरू किया। इससे उनकी आमदनी में वृद्धि होने लगी और व्यवसाय भी बेहतर तरीके से चलने लगा। उन्होंने सीआईएफ की पूरी राशि समूह को वापस कर दी।

समूह की बैठकों में नियमित भागीदारी से गुड़िया को नई जानकारियां और स्वरोजगार के नए अवसरों के बारे में जानने का मौका मिलता रहा। अपनी आजीविका को और आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने गांव में सिलाई की दुकान शुरू करने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने सिलाई का काम भी प्रारंभ कर दिया। किराना, श्रृंगार सामग्री, गिफ्ट पैकिंग और सिलाई जैसी विभिन्न गतिविधियों से उनकी आमदनी के स्रोत बढ़े और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगी।

इसी दौरान उनके स्वसहायता समूह का कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) भी स्वीकृत हुआ, जिसके तहत समूह को 1 लाख 50 हजार रुपये की राशि मिली। गुड़िया ने इस वित्तीय सहायता और समूह से मिले अनुभव के आधार पर अपनी आजीविका को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास जारी रखे। उन्होंने धीरे-धीरे सीसीएल की राशि भी वापस कर दी।

गुड़िया साकेत बताती हैं कि स्वसहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके आत्मविश्वास में काफी वृद्धि हुई है। अब वे अपने परिवार का खर्च आसानी से चला पाती हैं और नियमित बचत भी करती हैं। समूह की बैठकों में सहभागिता और स्वरोजगार के अनुभव ने उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनने के साथ-साथ समाज में अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर दिया है।

गुड़िया का मानना है कि प्रत्येक योग्य महिला को आगे बढ़ने और अपने अधिकार प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिए। उनका प्रयास रहता है कि दूसरी महिलाएं भी स्वसहायता समूह से जुड़ें, अपनी क्षमताओं को पहचानें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें।

गुड़िया साकेत की यह यात्रा दर्शाती है कि स्वसहायता समूह, सामूहिक बचत, वित्तीय सहायता और निरंतर प्रयासों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं अपनी आजीविका को मजबूत कर सकती हैं। उनकी सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा है कि छोटे-छोटे प्रयासों से भी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan जनता का संदेश के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।